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RGPV : एजुकेशन टूर के नाम पर हवाई यात्रा में उड़ा दिए लाखों रुपए, अब सरकार कर रही जांच

पांच साल में फैकल्टी ने की 50 से ज्यादा विदेश यात्राएं, सेमिनार-वर्कशॉप पर लाखों खर्च, विद्यार्थियों को नहीं मिला फायदा

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RGPV एजुकेशन टूर के नाम पर हवाई यात्रा में उड़ा दिए लाखों रुपए, अब सरकार कर रही जांच

भोपाल. राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विवि (आरजीपीवी) प्रबंधन की ओर से रिसर्च वर्क के लिए इंजीनियरिंग कोर्स की फैकल्टी को पिछले पांच साल के दौरान 50 से अधिक यात्राएं कराईं गईं। शासन से अनुमति लेकर इन यात्राओं का 80 लाख से ज्यादा भुगतान किया गया, लेकिन विद्यार्थियों को इसका कोई फायदा नहीं मिला। विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन के लिए विवि प्रबंधन ने प्रायवेट शिक्षण संस्थानों से एमओयू कर कोर्स ओरिएंटेशन के सेमिनार और वर्कशॉप आयोजित करवाए। इन आयोजनों पर भी 65 लाख रुपए के बिलों का भुगतान किया गया। तकनीकी शिक्षा संचालनालय को भेजे हिसाब में इन खर्चों को विद्यार्थियों की सुविधा पर खर्च राशि के नाम से दर्ज किया गया। शासन ने इन खर्चों पर आपत्ति जताई है और प्रमुख सचिव के निर्देशन में जांच समिति गठित कर सात दिनों के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करने कहा है।

प्लेसमेंट में गिरावट, आईआईएम का सहारा
प्रदेश के इकलौते तकनीकी विवि का दर्जा प्राप्त आरजीपीवी के खराब प्रदर्शन की वजह से पिछले सालों में प्लेसमेंट की दर में गिरावट दर्ज की गई है। जिन विद्यार्थियों ने खुद के प्रयासों से बेहतर नौकरियां प्राप्त की हैं विवि उनका श्रेय भी खुद लेकर विज्ञापनों में इसे प्रचारित कर रहा है। प्रबंधन के पास प्रतिवर्ष प्लेसमेंट के आंकड़ें मौजूद नहीं हैं जबकि ट्रेनिंग और प्लेसमेंट का पद बनाकर एक लाख रुपए प्रतिमाह वेतन जारी किया जा रहा है।

डायरेक्टर ने शासन को भेजी रिपोर्ट
सरकारी बजट के आवंटन और आरजीपीवी सहित प्रदेश के अन्य सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में विद्यार्थियों की सुविधा पर खर्च राशि के मामले में तकनीकी शिक्षा संचालक ने अपना जवाब भेज दिया है। प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार को शासन ने नोटिस भेजकर बजट आवंटन और हिसाब किताब का ब्योरा मांगा था।

जांच समिति को रिपोर्ट भेज दी है। मेरे खिलाफ गलत तथ्यों के आधार पर शिकायतें की गईं हैं।
प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार, संचालक, तकनीकी शिक्षा

आरजीपीवी में विद्यार्थियों के विकास का पैसा फिजूलखर्ची पर खर्च हो रहा है। शासन से इस मामले में कार्रवाई की मांग की है।
विवेक त्रिपाठी, प्रदेश प्रवक्ता, एनएसयूआई