
समारोह में वर्ष 2018 व 2019 के उत्तीर्ण स्नातक एवं स्नातकोत्तर के स्टूडेंट्स को उपाधियां दी गईं।
भोपाल. राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विवि का 11वां दीक्षांत समारोह कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल और आरजीपीवी के कुलाधिपति मंगूभाई पटेल ने की। वहीं, मुख्य अतिथि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद नई दिल्ली के अध्यक्ष प्रो. अनिल डी सहस्त्रबुद्धे, विशिष्ट अतिथि प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा विभाग आकाश त्रिपाठी थे। समारोह में वर्ष 2018 व 2019 के उत्तीर्ण स्नातक एवं स्नातकोत्तर के स्टूडेंट्स को उपाधियां दी गईं। समारोह में 55 पीएचडी प्रदान की गई, साथ ही विवि की प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले 136 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण और रजत पदक प्रदान किए गए। इसमें 2018 बैच की अमृतेंद्रिनि देवी को पांच गोल्ड और 2019 बैच की शालिनी सिंह को पांच गोल्ड मेडल प्रदान किए गए।
देश सेवा के लिए ज्वॉइन की नेवी
अमृतेंद्रिनि देवी को ओवरऑल गोल्ड मेडल, यूनिवर्सिटी गोल्ड मेडल, चेयरमैन व्यवसायिक परीक्षा मंडल, श्री रावतपुरा सरकार गोल्ड मेडल और प्रोफेसर एसपी चक्रवर्ती फाउंडर, प्रिंसिपल जेईसी मेमोरियल गोल्ड ईसी, ईई, एमई, सीई श्रेणी में गोल्ड प्राप्त हुए। उन्होंने बताया, मैं 2018 बैच की इलेक्ट्रॉनिक्स एण्ड कम्युनिकेशन ब्रांच की स्टूडेंट हूं। मेरे माता-पिता योग टीचर हैं। बचपन से स्पोट्र्स पसंद है। जिम्नास्टिक और चेस की नेशनल खिलाड़ी रही। बड़े भाई आर्मी में हैं। इसलिए मैंने भी नेवी ज्वाइन चाहा। अलसुबह फिजिकल की तैयारी करती थी, फिर कॉलेज की पढ़ाई। 2019 में नेवी में चयन हुआ। मैं कॉलेज में पढ़ाई करने के साथ ही शॉर्ट नोट्स भी बनाती थी, एग्जाम के समय रिवीजन करने में आसानी होती थी। इससे हर चैप्टर को दो से तीन बार पूरा पढऩे का मौका मिल जाता था।
परिवार की पहली आर्किटेक्ट हूं
तान्या गुप्ता ने बताया कि बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर ब्रांच की 2019 बैच की स्टूडेंट हूं। तीन गोल्ड मेडल मिले। 2019 में फर्म में काम शुरू किया था। डिजाइनिंग में कॅरियर बनाने का निर्णय लिया। इसमें क्रिएटिविटी दिखाते हुए खुद को एक्सप्लोर किया। मैं जबलपुर की रहने वाली हूं। मैं परिवार की पहली आर्किटेक्ट हूं। वहीं, केशव राठी ने बताया कि मैं 2018 बैच का बीआर्क का स्टूडेंट हूं। मुझे तीन गोल्ड मेडल मिले हैं। मैं बिजनेस फैमिली से जुड़ा हूं। पहले पापा भी चाहते थे कि मैं उनके साथ कपड़े के बिजनेस में जुड़ जाऊं। मैंने लॉकडाउन में खुद की फर्म खोली। मेरे मामा मेरे इंस्पिरेशन बनें, वे एक बिल्डर हैं और उन्हें देखकर मैने आर्किटेक्ट बनने का फैसला लिया। मेरी पत्नी भी इसी फील्ड से जुड़ी हुई है।
Updated on:
01 Mar 2022 01:08 am
Published on:
01 Mar 2022 01:07 am
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