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ऐसे मांगे जीवन की सबसे बड़ी गलती की माफी, जानें पश्चाताप का सही तरीका

अंजाने में हुए पाप पर प्रायश्चित के लिए सालों पहले महाराज परीक्षित ने भी सवाल किया था, जिसे श्रीमद्भागवत के षष्टम स्कन्ध में दर्ज किया गया था।

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भोपाल

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Juhi Mishra

Aug 16, 2017

Right Way to Repentance

Right Way to Repentance

भोपाल। गलतियां हम सभी करते हैं। छोटे छोटी गलतियां करते हैं और बड़ों से बड़ी गलतियां हो जाया करती हैं। पर ऐसा नहीं है कि लोग जानबूझकर अपने लिए गढ्ढा खोदते हैं बल्कि कई बार हम अनजाने में ऐसा कुछ कर बैठते हैं जिससे जीवनभर अपराधबोध महसूस होता है। सभी धर्मों में पाप-पुण्य का महत्व है। किसी के द्वारा किए गए सही और गलत कामों को पाप-पुण्य में बांटा जाता है। अनजाने में की गई गलतियों की सजा भले न मिले पर उसके परिणाम जरूर भुगतने पड़ते हैं। इसलिए हर धर्म में गलती होने पर उसके पश्चाताप के तरीके को सुझाया गया है।

भगवत गीता में है जवाब
शुकदेव महाभारत काल के मुनि और वेदव्यास के पुत्र थे। शुकदेव बचपन में ही ज्ञान प्राप्ति के लिए वन में चले गये थे। शुकदेव जी ने व्यास से महाभारत पढ़ा था और उसे देवताओं को सुनाया था। कहते हैं कि अंजाने में हुए पाप पर प्रायश्चित के लिए सालों पहले महाराज परीक्षित ने भी सवाल किया था, जिसे श्रीमद्भागवत के षष्टम स्कन्ध में दर्ज किया गया था। महाराज परीक्षित ने शुकदेव से सवाल किया था कि यदि हम अनजाने में कोई पाप करते हैं तो उसका प्रायश्चित कैसे किया जाए? कई बार हम अनजाने में अपने पैरों तले चीटियों को रौंद देते हैं, श्वास के माध्यम से वायु में मौजूद जीवों को नष्ट करते हैं, लकडिय़ों को जलाते समय उस पर मौजूद जीवों का नाश कर देते हैं. तो ऐसे पापों का प्रायश्चित कैसे किया जाए?

प्राश्चित के सही तरीके
आचार्य शुकदेव ने अंजाने में हुए पापों से मुक्ति के लिए रोज प्रतिदिन 5 प्रकार के यज्ञ करने की सलाह दी। ये 5 यज्ञ मनुष्य को अनजाने में किए गए बुरे कृत्यों के बोझ से राहत दिलाते हैं।

पहला यज्ञ- आचार्य शुकदेव के अनुसार यदि अनजाने में हम कोई पाप कर देते हैं तो हमें उसके प्रायश्चित के लिए रोजाना गऊ को एक रोटी दान करनी चाहिए। जब भी घर में रोटी बने तो पहली रोटी गऊ ग्रास के लिए निकाल देना चाहिए।

दूसरा यज्ञ- प्राश्चित करने के लिए चींटी को 10 ग्राम आटा रोज वृक्षों की जड़ों के पास डालना चाहिए। इससे उनका पेट तो भरता ही है, साथ ही हमारे पाप भी कटते हैं।


तीसरा यज्ञ- आचार्य शुकदेव के अनुसार, पक्षियों को अन्न रोज डालना चाहिए। ऐसा करने से उनके भोजन की तलाश खत्म होती है और व्यक्ति को अपनी गलतियों का अहसास होने के साथ ही उसके दोषों से बचने का एक मौका मिलता है।

चौथा यज्ञ- आटे की गोली बनाकर रोज जलाशय में मछलियों को डालना चाहिए। इसके अलावा मछलियों का दाना भी डाला जा सकता है।

पांचवां यज्ञ- आचार्य शुकदेव के अनुसार, रोटी बनाकर उसके टुकड़े करके उसमें घी-चीनी मिलाकर अग्नि को भोग लगाएं। उन्होंने कहा कि यदि कोई रोजाना ये 5 यज्ञ सम्पन्न करता है तो वह अंजाने में हुए पापों के बोझ से मुक्ति पाता है।