31 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सावधान! टेढ़े हो रहे बच्चों के चेहरे, रोज अस्पताल पहुंच रहे आधा दर्जन बच्चे

बचाव ही उपाय, ओपीडी में हर रोज आ रहे हैं चेहरे पर लकवे की शिकायत के 5 से 6 मामले, बढ़ती ठंड के साथ बच्चों में बेल्स पॉल्सी का खतरा 48 घंटे में अस्पताल पहुंचे तो असर हो जाएगा कम

2 min read
Google source verification
palsy.png

भोपाल. राजधानी में बच्चों के चेहरे टेढ़े हो रहे हैं. बच्चों में चेहरे के लकवे के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। रोजाना सरकारी अस्पतालों में 5 से 6 बच्चे आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि गोल्डन पीरियड में इलाज मिलने से यह बीमारी पूरी तरह से ठीक हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार चेहरे पर लकवे के मामले भी इस सीजन में ज्यादा आते हैं। यह बीमारी चेहरे की नसों में सिकुड़न व सूजन से होती है। ऐसे में कान ढंक कर व गर्म कपड़े पहना कर ही बाहर जाने दें।

48 घंटे गोल्डन पीरियड
हमीदिया अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ.आइडी चौरसिया बताते हैं कि ओपीडी में हर रोज बेल्स पॉल्सी यानी चेहरे के लकवे से पीड़ित हर उम्र के मरीज आ रहे हैं। यदि मरीज बीमारी की चपेट में आने के 48 घंटे (गोल्डन पीरियड) के अंदर आ जाते हैं, तो इस बीमारी के स्थाई असर से मरीज को बचाया जा सकता है। मगर समय पर इलाज न मिले तो यह गंभीर परिणाम भी दे सकता है।

13 साल के बच्चे का 7 दिन से इलाज
जेपी अस्तपाल में आए 13 साल के आनंद को करीब 15 दिन पहले बुखार व जुकाम हुआ। घर के पास के एक डॉक्टर ने वायरल की दवा लिखी। दो दिन बाद कान में दर्द हुआ। बोलने में कठिनाई होने लगी। अगले दिन चेहरा एक तरफ से तिरछा होने लगा। परिजन उसे लेकर जेपी अस्पताल आए। डॉक्टरों ने चेहरे का लकवा होने की बात कही। जेपी में इलाल चल रहा है। 12 साल के अंश का इलाज भी पिछले तीन दिन से चल रहा है। अंश को बुखार व फिट्स आए, जिसके बाद उनमें इस बीमारी के लक्षण दिखने शुरू हुए।

यह लक्षण हों तो कराएं इलाज
● चेहरे का एक तरफ का हिस्सा मुरझाया व लटका हो
● खाने व पीने में कठिनाई हो
● एक तरफ से ही हंस पा रहा हो
● कान व सिर में दर्द हो
● आंखों में जलन

यह है उपाए
● चेहरे की मालिश व एक्सरसाइज
● गुब्बारा फुलाना
● ओम का उच्चारण करना
● आंख में चश्मा लगाना
● कान व सिर को ठंड से बचाने के लिए टोपी पहनना
● चेहरे की सिकाई

Story Loader