भोपाल

नदी जोड़ा परियोजना का दूसरा प्रोजेक्ट हो सकता है कालीसिंध, पार्वती और चंबल नदी पर

राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच पानी बंटवारे पर केंद्र तैयार कर रहा योजना, राष्ट्रीय गाइडलाइन को तोड़ते हुए राजस्थान 50 प्रतिशत डिपेंडिबिलिटी के आधार पर बैराज का काम कर रहा है।

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Jul 22, 2023

भोपाल। राजस्थान में मप्र की सहमति के बिना कालीसिंध नदी पर बनाए गए नवनेरा बैराज के बाद दोनों राज्यों में पानी बंटवारे को लेकर विवाद की स्थिति बन गई है। मप्र सरकार ने फरवरी में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर नवनेरा बैराज के निर्माण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी। दोनों राज्यों के बीच विवाद बढ़ता देख अब केंद्र सरकार ऐसा फॉमूर्ला बनाने की कोशिश कर रही है, जिससे दोनों राज्यों को फायदा हो सके। यह बात केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के सचिव पंकज कुमार ने पत्रिका से कही। वे यहां केन-बेतवा लिंक परियोजना की समीक्षा करने आए थे।

केंद्र के फॉर्मूले के तहत कालीसिंध, पार्वती और चंबल नदी को नदी जोड़ा परियोजना में शामिल किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो मध्यप्रदेश ही नहीं देश का भी दूसरा नदी जोड़ा प्रोजेक्ट होगा। केंद्र से फंड मिलेगा तो मध्यप्रदेश भी अपने हिस्से के पानी को बड़ी आबादी तक पहुंचा पाएगा। अभी चंबल नदी से भी 3900 क्यूसेक पानी प्रतिदिन मध्यप्रदेश को मिलना चाहिए, लेकिन राजस्थान 2700 से 3000 क्यूसेक पानी ही प्रतिदिन मप्र को दे रहा है।

ईआरसीपी में नहीं ली सहमति

राजस्थान ने ईस्टन राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ईआरसीपी) के फेज-1 में निर्माण पर मप्र से सहमति नहीं ली। राजस्थान सरकार का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के लिए मप्र की अनुमति जरूरी नहीं है, क्योंकि मप्र भी राजगढ़ जिले में कालीसिंध नदी के अपने हिस्से में कुंडालिया बांध बना चुका है। फेज-2 में प्रस्तावित बांधों के निर्माण पर मप्र से सहमति लेकर काम किया जाएगा।

राजस्थान 50 प्रतिशत डिपेंडिबिलिटी के आधार पर कर रहा काम

कालीसिंध नदी में अब भी मप्र के हिस्से का अनयूटिलाइज पानी बचा हुआ है। राजस्थान ने 2005 में जानबूझकर पीकेसी (पार्वती-कालीसिंध-चंबल) लिंक परियोजना पर सहमति नहीं दी थी, इस कारण मप्र को मजबूरी में अपनी जरूरतों के लिए मोहनपुरा और कुंडालिया डैम बनाने पड़े। राष्ट्रीय गाइडलाइन को तोड़ते हुए राजस्थान 50 प्रतिशत डिपेंडिबिलिटी के आधार पर बैराज का काम कर रहा है।

Published on:
22 Jul 2023 09:50 pm
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