
सहरिया जनजाति के बीच 7 साल रहकर सीखा टी-शट्र्स पर बना यह डिजाइन
भोपाल. संभाग में सहरिया जनजाति के साथ भेदभाव और समाज की मुख्यधारा से अलग करने का मामला सामने आया है। अखिल भारतीय सहरिया समाज महासभा के प्रदेश अध्यक्ष फूलसिंह सेमरिया ने 25 सितंबर, 2018 को मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर कई बिंदु सामने रखे। पत्र में लिखा है कि भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़ में सहरिया जनजाति की 1.5 लाख आबादी है, लेकिन संरक्षण, शिक्षा और सरकारी सुविधा नहीं मिलने से विलुप्त होती जा रही है।
यह भी लिखा है कि राजधानी के आसपास के सहरिया आदिवासियों के जन्म प्रमाण पत्र भी नहीं बन पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि ग्वालियर-चंबल संभाग के सहरिया आदिवासियों को सरकार ने सरकारी नौकरी में लेने का प्रावधान किया है, लेकिन राजधानी के आसपास विलुप्त हो रही सहरिया आबादी को इस तरह की सुविधा से वंचित रखा है। जबकि प्रदेशभर में यह जनजाति एक समान जीवन जी रही है, लेकिन सरकार ने इन्हें अलग-अलग कर दिया है।
विकासखंड में स्कूल-छात्रावास मांगा
आरोप लगाया गया है कि सहरिया विशेष पिछड़ी जनजाति है, इनके पास जमीन नहीं है। सरकारी मदद नहीं मिलने से पढ़ाई में पीछे हैं। लेकिन हमारी समस्या और परेशानियों का हल नहीं किया जा रहा है। विलुप्त होती जनजातियों के संरक्षण के लिए संभाग के हर जिलें के विकासखंड स्तर पर स्कूल और छात्रावास शुरु किया जाना चाहिए।
समाज को अलग-अलग कर रही सरकारी योजना
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुंभराज (गुना) की सहरिया आदिवासी महिलाओं को पोषण आहर के लिए एक हजार रुपए प्रति माह दिया जा रहा है। जबकि कुंभराज से लगे हुए शमशाबाद की आदिवासी महिला को इस योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा है। यह खुलेआम एक ही समाज के लोगों को अलग-अलग हिस्सों में बांट रहा है। इससे एक ही समाज के दो क्षेत्रों के लोगों में हीन भावना पैदा हो रही है।
रैली भी निकाल चुके हैं
ग्वालियर संभाग के सहरिया आदिवासियों को सरकारी नौकरी, जैसे पटवारी, पुलिस, बाबू, नाकेदार आदि में सीधी भर्ती में छूट दी है। वहीं प्रदेश के अन्य जिलों में रहने वाले सहरिया समाज पर यह नियम लागू नहीं है। इससे परेशान होकर सहरिया समाज के अन्य जिलों के लोगों ने रैली भी निकाली थी। लेकिन सुनवाई नहीं होने पर प्रदेश अध्यक्ष फूलसिंह सेमरिया ने पत्र में गंभीर आरोप लगाए हैं।
सहरिया जनजाति पीवीटीजी में अधिसूचित है और इनके जिले भी घोषित है। जिन जिलों में यह जनजाति पीवीटीजी घोषित होगी, उन्हीं जिलों के लोगों को सरकार की विशेष सुविधाओं का लाभ मिलेगा। यदि ये जिले अधिसूचित नहीं होंगे तो उन्हें कैसे इसमें शामिल किया जा सकता है?।
वीडी सिंह, संयुक्त संचालक, आदिम जाति कल्याण विभाग
ग्वालियर संभाग में सरकारी योजना लागू होने से पहले ही मैंने कई स्तर पर सहरिया आदिवासियों के हक के लिए मांग की है। लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। अब ग्वालियर संभाग के लोगों को विशेष छूट दे दी गई। जबकि भोपाल संभाग में आदि काल से निवासरत सहरिया जाति को भूला दिया गया है। ध्यान नहीं देने से ही सहरिया का जीवन संकट में है। एक ही प्रदेश में एक ही समाज पर दोहरा रवैया कहां का न्याय है?
फूलसिंह सेमरिया, प्रदेश अध्यक्ष, अखिल भारतीय सहरिया समजा महासभा, मप्र
Published on:
30 Sept 2018 08:11 am
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
