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30 रुपए की एंट्री में सामान्य पार्क जैसा सैर सपाटा

30 रुपए की एंट्री में सामान्य पार्क जैसा सैर सपाटा

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ढाई करोड़ की लागत से पार्क का निर्माण करने वाली नगर परिषद ने नहीं भरा विद्युत बिल, पसरा अंधरा - नप ने नहीं किया भुगतान, सार्वजनिक स्थलों के कटे कनेक्शन

ढाई करोड़ की लागत से पार्क का निर्माण करने वाली नगर परिषद ने नहीं भरा विद्युत बिल, पसरा अंधरा - नप ने नहीं किया भुगतान, सार्वजनिक स्थलों के कटे कनेक्शन

भोपाल. राजधानी के प्रमुख आमोद-प्रमोद स्थलों में शामिल सैर सपाटा बदहाल है। बड़ा तालाब का व्यू, केबल हैंगिंग ब्रिज समेत मनोरंजन के अन्य साधनों का आनंद लेने पहुंचने वाले पर्यटक ठगा सा महसूस करते हैं।

30 रुपए की फीस देकर भी उन्हें तालाब किनारे वाले सामान्य पार्क जैसा ही महसूस हो रहा है। जिन साधनो-सुविधाओं से सैर सपाटा को पर्यटकों में लोकप्रिय किया गया था वे या तो टूट रहे हैं या फिर बंद पड़े हैं।

एकमात्र टॉय ट्रेन ही यहां पर बच्चों को आकर्षित कर पा रही है। इतना ही नहीं, यहां पर लोगों को मनोरंजन की सुविधाएं देने की बजाय पर्यटन विभाग अपनी कमाई का गणित तय कर रहा है। वह तालाब से 50 मीटर दायरे में ही एक पक्के ओपन स्पेस का निर्माण कर रहा है। करीब डेढ़ करोड़ रुपए से यहां छोटे कार्यक्रम के लिए स्थान उपलब्ध कराने की योजना है।

ऐसे ठगा रहे पर्यटक

- यहां पर लेजर शो का पूरा निर्माण किया है। फव्वारों के साथ बैठक व्यवस्था भी है। बीते पांच माह से ये पूरी तरह बंद है। यहां किसी तरह का पानी नहीं है ओर बैठक भी जर्जर हो रही है। पांच माह पहले तक पर्यटकों को शाम के समय ये मनोरंजन का अच्छा साधन था।

- तालाब के अंदर फव्वारे निकालकर किनारे रख दिए गए हैं। हालांकि अभी पानी की कमी को इसकी वजह बताया जा रहा है, लेकिन जब पानी था, तब भी ये फव्वारे निकाले जा चुके थे।

- ट्रैक की पर्श टूट रही है। यहां आने वाले पर्यटकों के पूरे सैर सपाटा में भ्रमण के लिए पर्श का ट्रैक बनाया है। रखरखाव के अभाव में ये फश निकल रही है।
- यहां करीब 14 लाख रुपए में अंदर एक पुल बनाकर बच्चों को नाम नौकायन का आनंद दिलाने व्यवस्था की थी। फिलहाल ये भी बंद है। नावों को खरीदी में भी गड़बड़ी सामने आ रही है।

रात को बंद रहती है लाइट्स

स्थिति ये हैं कि रात को आकर्षण के लिए लगाई जाने वाली लाइट्स बंद हो जाती है। सैर सपाटा शब्द को रात को चमकाने वाली लाइटिंग भी बंद रहती है। कई शब्द रात को अंधेरे में नजर ही नहीं आते हैं।

पंप से खींच रहे तालाब का पानी

तालाब का पानी सीधेतौर पर कोई नहीं खींच सकता। यहां पर पंप तालाब के भीतर ही डालकर सीधे पानी खींच रहे हैं। इससे ही यहां पर पूरी धुलाई, सफाई का काम होता है। जबकि भेल, रेलवे समेत अन्य एजेंसियों को निगम राशि लेकर पानी देती है।

यहां पर्यटन विभाग के क्षेत्रीय प्रबंधक आरए नकवी से जब इन स्थितियों पर जवाब मांगा तो वे कोई जवाब नहीं दे पाए। सिर्फ इतना ही कहा कि व्यवस्थाओं को दुरूस्त कर रहे हैं। जल्द ही सब ठीक होगा।