
भोपाल। संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) या सकट (Sakat Chauth) का व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। 2018 में यह तिथि 5 जनवरी 2018 को पड़ रही है। शुक्रवार यानी आज के दिन यह तिथि आने से इसका महत्व कई गुना बढ़ गया है क्योंकि शुक्रवार की देवी धन (महालक्ष्मी ) का दिन होता है। इसलिए गणपति के साथ लक्ष्मी का पूजन और भी ज्यादा सौभाग्यवर्धक होगा...
सकट चौथ व्रत कथा और इसका महत्व - Sakat Chauth Vrat Katha
भोपाल के साथ-साथ यह व्रत देश के विभिन्न भागों में मनाया जायेगा, स्त्रियां अपनी संतान की लम्बी उम्र और सफलता पाने के लिए करती हैं। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से प्रभु गणपति बच्चों के जीवन और विशेषतौर से उनके कार्यक्षेत्र में आनेवाली बाधाओं को दूर कर देते हैं। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती है और शाम को गणेश पूजन तथा चंद्रमा को अर्घ्य देने पश्चात् ही जल ग्रहण करती है। करियर में उन्नति के लिए पुरुष भी इस व्रत को कर सकते हैं।
MP में उल्लासपूर्वक मनाया जाता है त्योहार...
देशभर के विभिन्न राज्यों में इस त्योहार को अलग अलग तरीके से मनाया जाता है। इसी के तहत मध्यप्रदेश में भोपाल सहित कई जिलों में भी इस त्योहार को लोग उल्लासपूर्वक मनाते हैं। इस दिन लोग व्रत रखने के साथ ही गणेश मंदिर में दर्शन के लिए भारी तादाद में आते हैं।
भोपाल में मुख्य रूप से पिपलानी गणेश मंदिर व छोला के प्राचीन गणेश मंदिर सहित सीहोर के गणेश मंदिर में इस दिन हजारों लाखों की संख्या में भक्त श्रीगणेश के दर्शन को आते हैं।
इस त्योहार के संबंध में पं.सुनील शर्मा का कहना है कि इस दिन मध्यप्रदेश सहित अधिकांश राज्यों में संकटा चतुर्दशी का व्रत किसी भी प्रकार के संकट से पार पाने के लिए रखा जाता है।
मान्यता है कि इस व्रत को रखने से सभी कष्ट दूर हो जाते है। इसके अलावा भोपाल में कई जगहों पर बने अन्य गणेश मंदिरों में भी इस दिन भक्त भगवान के दर्शन करने पहुंचते हैं और उल्लासपूर्वक इस त्योहार को मनाया जाता है।
ऐसे करें पूजा...
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह स्नान आदि के बाद व्रत करने वालों को लाल रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद स्वच्छ आसन पर बैठकर पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुंह कर के श्रीगणेश की पूजा करने चाहिए।
सकट चौथ व्रत की विधि -
इस दिन संकट हरण गणपति का पूजन होता है। गणेशजी की पूज के बाद चंद्रमा की पूजा की जाती है। प्रात: काल नित्य कर्म से निवृत होकर विधि-विधान से गणेशजी की पूजा करें। गणपति के किसी भी श्लोक से आप उनकी स्तुति कर सकते हैं। इसके बाद उनकी आरती करें। इस श्लोक का पाठ कर सकते हैं...
गजाननं भूत गणादि सेवितं,कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्।
उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्॥
सकट व्रत वाले दिन शाम को ऐसे करें भगवान का पूजन
सूर्यास्त के बाद स्नान कर साफ कपड़े पहनें। अब विधिपूर्वक गणेश जी का पूजन के लिए एक कलश में जल भरकर रखें । धूप-दीप अर्पित करें। नैवेद्य के रूप में तिल तथा गुड़ के लड्डु, गन्ना, शकरकंद, अमरूद सहित अन्य मौसमी फल, गुड़, तिल तथा घी अर्पित करें। इसके पश्चात गणेशजी की कथा सुनें।
सकट चौथ के दिन पूजा करने का यह भी है रिवाज
सभी फल, गुड़ में पकाए गए शकरकंद, तिल और गुड़ को कूटकर बनाया गया तिलकुठ और नैवेद्य रात्रि भर बांस के बने हुए डलिया (टोकरी) से ढंककर रख दिया जाता है।
अगली सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के बाद घर के पुरुष विशेषतौर पर पुत्र इस डलिया का प्रसाद परिजनों में वितरित करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे भाई-बंधुओं में आपसी प्रेम बढ़ता है।
इस तरह करें सकट (Sakat Chauth ) की पूजा का समापन
गणेश भगवान की पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें। धूप-दीप दिखाएं । चंद्रदेव से अपने परिवार की समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। तिलकुट का प्रसाद गणपति पूजा के बाद ही ग्रहण कर लिया जाता है। जबकि फल इत्यादि अगले दिन वितरित किए जाते हैं।
Published on:
05 Jan 2018 11:39 am
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