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संस्कृत रंगमंच: राजधानी में पहली बार देशभर के कलाकारों का जमावड़ा, संस्कृत को बढ़ावा देने अनूठा प्रयास

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से प्रशासन अकादमी में संस्कृत नाट्य समारोह का आयोजन

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भोपाल। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से तीन दिवसीय संस्कृत नाट्य महोत्सव का आयोजन प्रशासन अकादमी में किया जा रहा है। इसमें देशभर के 11 संस्कृत विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों ने सहभागिता कर रहे हैं। उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि एक्टर नीतीश भारद्वाज थे। उन्होंने कहा कि कलाकार कला के प्रभाव से स्वयं ही स्वतन्त्र होता है। नाटक का उद्देश्य मात्र मनोरंजन नहीं होता है बल्कि दर्शकों को एकभाव विश्व से निकालकर दूसरे भाव विश्व में पहुंचाना होता है। इसके चलते कलाकार कभी परतंत्र हो ही नहीं सकता। इस अवसर पर कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा कि आधुनिक युग में भी यह अत्यावश्यक है कि कला, कर्म व संस्कृत एक-दूसरे के साथ-साथ रहें। कलाधर्मिता के साथ में यदि संस्कृत जुड़ी रहती है तभी भारतीय संस्कृति पोषित व पल्लवित होती है।

देशभर के विद्यार्थी, हर ग्रुप में 25 सदस्य
देशभर में मौजूद संस्कृत विश्वविद्यालय के 11 परिसरों के विद्याथियों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर नाटक तैयार किए हैं। इसमें साहित्य, व्याकरण, ज्योतिष, जैन दर्शन, आधुनिक विषय और शिक्षा शास्त्री जैसे विभागों के विद्याथियों ने 15 से 20 दिन की रिर्हसल की। रंगकर्मियों ने उन्हें रंगमंच की बारिकियों से रू-ब-रू कराया तो शिक्षकों ने संस्कृत संवाद सिखाए। हर ग्रुप में 25 सदस्य थे। समारोह से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस समारोह का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत भाषा को बढ़ावा देना है। संस्कृत में सैकड़ों सालों से नाटक लिखे जा रहे हैं। स्वतंत्रता संग्राम और देश के अमर बलिदानियों पर भी नाटक लिखे गए हैं, लेकिन आमजन तक इनकी पहुंच नहीं है। पहले दिन नाटक स्वातंन्त्र्यशौर्यम्, मिवारप्रतापम् और गीर्वाणविजयम् का मंचन हुआ। करीब दस साल बाद भोपाल परिसर को इस समारोह को कराने की जिम्मेदारी दी गई है।

स्वांतन्त्र्यशौर्यम् में आजाद की गाथा
स्वांतन्त्र्यशौर्यम् का लेखन प्रो. शिवजी उपाध्याय ने किया है। नाटक चंद्रशेखर आजाद के बलिदान पर आधारित है। नाटक में दिखाया गया कि आजाद गांधीजी के जीवन से काफी प्रभावित रहे। 15 वर्ष की आयु में आंदोलन में हिस्सा लेने पर उन्हें 15 कोड़े की सजा दी जाती है। इसका मंचन जम्मू परिसर के विद्यार्थियों ने किया। वहीं, श्रीवेदव्यास परिसर, बलाहर(हिमाचल प्रदेश) के दल ने मिवारप्रतापम् के एक से तीन अंक तथा लखनऊ परिसर के दल ने चार से छह अंक यानी दो अलग-अलग भागों में नाटक की प्रस्तुति दी। अगली कड़ी में गुरुवायूर परिसर, केरल के दल ने गीर्वाणविजयम् का मंचन किया।

बेस्ट एक्टर का अवार्ड जीता
कृष्णकांत पांडेय ने बतकाया कि मैं शिक्षा शास्त्री(बीएड) की भोपाल परिसर से पढ़ाई कर रहा हूं। पिछले साल केरल में हुए नाट्य समारोह में मुझे बेस्ट एक्टर का अवार्ड मिला था। 2015 में पहली बार पढ़ाई करते हुए मैंने रंगमंच करना सीखा। अब तक 10 संस्कृतभाषी नाटक में अभिनय कर चूका हूं। संस्कृत में बहुत अच्छी कहानियां हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में अभी इनका मंचन कम ही हो पाता है। वहीं, सनित स्वामी ने बताया कि मैं जम्मू परिसर से जुड़ा हूं। मैं करीब 15 साल पहले पढ़ाई करते हुए संस्कृत रंगमंच से जुड़ा। इसके बाद उसी कैंपस में पढ़ाने लगा। मैं निर्देशन की जिम्मेदारी संभालने के साथ फिल्म और टीवी इंडस्ट्री से भी जुड़ा हूं। रंगमंच हो या फिल्म, भाषायी उच्चारण अच्छा होना बहुत जरूरी है। जिसे संस्कृत भाषा का ज्ञान होता है, उससे उच्चारण में गलती होने की संभावना बहुत कम हो जाती है। संवाद अदायदगी को बेहतर बनाने के लिए संस्कृत एक अच्छा ऑप्शन है।

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