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60 की उम्र में सरला ताई बनी खाने- खजाने का ब्रांड

- दिवाली में एक सप्ताह में बेंचे 1 लाख के उत्पाद

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भोपाल@रूपेश मिश्रा

60 की उम्र में आते- आते ज्यादातर लोग खुद को रिटायर मान लेते हैं। लेकिन भोपाल की सरला ताई इस उम्र में खाने- खजाने का एक जाना पहचाना नाम बनी हुई हैं। खास बात ये है कि ताई इस उम्र में भी दोनों हाथों में छोला टांगे घर- घर जाकर नमकीन, मठरी, चकली, लड्डू और अचार जैसे स्वादिष्ठ उत्पाद लोगों के घर जाकर पहुंचाती हैं। सरला ताई ने बताया कि खाना बनाना हमेशा से उनका शौक रहा है। उन्होंने बताया कि जब ये काम उन्होंने शुरू किया तो समाज के लोगों ने कई तरह की टिप्पणीयां की लेकिन अपने हौसले के बदौलत पिछले 28 सालों से इसी काम में पूरी लगन से जुटी हुई हैं।
शुद्धता और स्वाद घर ती खींच लाया

सरला ताई को प्रोडक्ट की शुद्धता से लोग इतना प्रभावित हुए कि अब धीरे- धीरे उनके पास लोगों का लंबा- चौडा़ कारवां जुड़ गया है। ताई ने बताया कि पहले वो लोगों के घर- घर जाकर सामान दिया करती थी। लेकि जब लोगों को स्वाद और शुद्धता पसंद आई तो लोगों ने घर आकर सामान लेना शुरू कर दिया।

त्यौहारों के वक्त एक सप्ताह में बेंचा 1 लाख का सामान

सरला ताई ने बताया कि त्यौहारों के वक्त डिमांड इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि सप्लाई करना मुश्किल होता है। खासतौर पर दिवाली पर तो मावा, मिठाई और मठरी की खूब मांग होती हैं। ताई ने बताया कि दिवाली के वक्त एक सप्ताह में करीब लाख रूपए तक के सामान बिक जाते हैं।

खुद चलाती हैं पूरा कारोबार

60 साल उम्र में सरला ताई खुद पूरा कारोबार चलता हैं। उन्होंने कहा कि वो तड़के सुबह से ही अपने इस काम में जुट जाती हैं और देर शाम तक इसी काम में लगी रहती हैं। उन्होंने अपने साथ तीन- चार अन्य महिलाओं को भी जोड़ रखा है जो ताई की सहायता करती हैं।