
भोपाल। मैंने अपने बच्चे का एडमिशन आरटीई के अंतर्गत तीन साल पहले गोविंदपुरा स्थित सेंट पीटर्स मारथोमा हाईस्कूल में कराया था। नर्सरी से अब तक बच्चे को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई लेकिन इस वर्ष स्कूल प्रबंधन शिक्षा विभाग का नया नियम बताकर फीस के नाम पर 1500 रुपए वसूल रहा है। वहीं इस वर्ष बच्चा तीसरी कक्षा में गया है, लेकिन फीस जमा नहीं होने के कारण उसे जूनियर्स के साथ दूसरी कक्षा में बैठाया जा रहा है। टीचर द्वारा बच्चे को रोजाना यह कहकर प्रताडि़त किया जा रहा है कि तुम्हारे पापा से बोलो स्कूल में पढऩा है तो फीस जमा करें, नहीं तो तुम अगले महीने से स्कूल नहीं आना।
सर, बच्चे ने जब यह बात मुझे बताई तो मैंने स्कूल प्रबंधन से फीस की जानकारी मांगी। तब उन्होंने कहा कि सरकार से उनके पास प्रति बच्चे के लिए 463.50 रुपए ही दिए जाते हैं, जिसमें बच्चे को स्कूल की सभी सुविधाएं नहीं दी जा सकती। शिक्षा विभाग के नए नियम के अनुसार स्कूल प्रबंधन स्कूल में होने वाली अन्य गतिविधियों के नाम पर फीस वसूल कर सकते हैं। यह कहना था बच्चे के पिता इकबाल खान का। उन्होंने सोमवार को बाल आयोग में शिकायती आवेदन दिया।
इकबाल ने बताया कि फीस जमा नहीं होने के कारण उसे प्रताडि़त कर रहे हैं। बच्चे को तरह-तरह से प्रताडि़त किया जा रहा है। जिसके कारण बच्चा स्कूल जाने से भी डरने लगा है। वहीं सोमवार को जब मां के साथ बच्चा स्कूल गया तो स्कूल प्रबंधन ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और कहा कि बच्चे की फीस के लिए रूपए नहीं है तो उसे घर में बिठाओ।
एक्टिविटी के नाम पर वसूल सकता है फीस
प्रिंसिपल डॉ. अल्पना सुनील कुमार का कहना है शिक्षा विभाग द्वारा बनाए गए नए नियम के माध्यम से स्कूल प्रबंधन एक्टिविटी के नाम पर फीस वसूल सकता है। आरटीई के अंतर्गत एडमिशन प्राप्त सभी बच्चों के अभिभावकों ने फीस जमा कर दी है।
आयोग के समक्ष शिकायती आवेदन अभिभावक द्वारा दिया गया है। केस को संयुक्त बेंच के समक्ष रखेंगे। इसके अलावा डीपीसी को पत्र लिख दिया गया है जिसमें जांच के आदेश दिए हैं।
-ब्रजेश चौहान, सदस्य, बाल आयोग
Published on:
10 Apr 2018 06:02 pm
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