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शहर में चल रहीं चार हजार स्कूल वैन व मैजिक से हो सकता है हादसा

वैन और मैजिक से हर रोज 10 हजार बच्चे जाते हैं स्कूल, स्कूल वाहनों की हालत खराब

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school van

भोपाल। इंदौर हादसे के बाद जागी ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की स्कूल वाहनों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई महज दिखावा साबित हो रही है। दोनों विभागों की जांच स्कूल बस तक सिमट कर रह गई है। जबकि, शहर में चार हजार से अधिक स्कूल वैन, मैजिक बेलगाम दौड़ रही हैं। इन पर पुलिस की नजर ही नहीं है। हालात यह कि अधिकतर स्कूल वैन, मैजिक कंडम हैं, इसके बावजूद वह बच्चों को ठूंस-ठूंसकर सडक़ों पर फर्राटा भर रही हैं। इतना ही नहीं कई स्कूलवैन गैसकिट से दौड़ती मिलीं। पुलिस वैन चालकों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही।

स्कूल बसों के साथ ही बच्चों को स्कूल ले जाने वाले सभी तरह के वाहनों की जांच की जाएगी। गैस किट से चलने वाली स्कूल वैन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
- महेन्द्र जैन, एएसपी ट्रैफिक

कैंपियन स्कूल, शाहपुरा
स्कूल के बाहर सफेद रंग की स्कूल वैन आकर रुकी। वैन में एमपी 20 लिखी टूटी नंबर प्लेट लगी थी। वैन पूरी तरह कंडम हालत में थी। वैन चालक ने करीब 10-15 बच्चों को दो मिनट के अंदर ठूंस-ठूंसकर वैन में बैठाकर चलता हो गया। वैन के इंजन की आवाज गैस से चलने जैसी लगी। वहीं कई मैजिक वाले बच्चों को डिग्गी में बैठा रहे थे।

जिस वाहन से हादसा उसी पर कार्रवाई
पुलिस, परिवहन विभाग की कार्रवाई में अकसर यह देखा गया कि जिस वाहन से कोई बड़ा हादसा होता है तो उसी वाहनों की जांच करती है। बाकि पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। इंदौर में बस से हादसा हुआ तो पुलिस ने स्कूल बसों की जांच शुरू की।

सेंट मैरीज स्कूल सेकंड स्टॉप
स्कूल के पास से ब्लैक कलर की स्कूल वैन पहुंची। बच्चों को बैठाते हुए चालक ने वैन बढ़ाई। इस दौरान चालक मोबाइल फोन पर बात करता रहा। बच्चों ने उसे रोका, लेकिन वह नहीं माना। रफ्तार बढ़ाते हुए वह आगे बढ़ गया। पूरे रूट पर कहीं पुलिस नजर नहीं आई।

कार्मल कॉन्वेंट
स्कूल की छुट्टी के समय नीले कलर की एक वैन आई। उसने बच्चों को भरना शुरू किया। धीरे-धीरे सात सीटर वैन में एक के ऊपर एक 16 बच्चे बिठाए गए। वैन भी एलपीजी से चल रही थी।