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वैज्ञानिकों और चिकित्सकों की चेतावनी, ‘हेपेटाइटिस-सी’ साइलेंट किलर, रहें अलर्ट

MP News: हेपेटाइटिस सी लीवर को खराब करने वाला एक वायरस इंफेक्शन है। इससे लिवर में सूजन और इंफेक्शन हो जाता है....

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(फोटो सोर्स: सोशल मीडिया)

(फोटो सोर्स: सोशल मीडिया)

MP News: संक्रमित रक्त चढ़ाने, असुरक्षित यौन संबंध और नशे में इस्तेमाल होने वाली सुइयों के संक्रमण से प्रदेश में हेपेटाइटिस-सी साइलेंट किलर बनता जा रहा है। इससे प्रदेश की करीब दो प्रतिशत यानी 20 लाख लोग प्रभावित हैं। दुर्भाग्यवश भोपाल समेत प्रदेश के अन्य बड़े शहरों में प्रशिक्षित क्लिनिकल रिसर्च प्रोफेशनल्स की भारी कमी है।

इसलिए भी इस तरह के वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। शहर में बीते दिन आयोजित मप्र के पहले क्लिनिकल रिसर्च एंड ट्रायल सेमिनार में इस गंभीर समस्या पर चर्चा हुई।

वैज्ञानिकों ने चिंता जताई

सेमिनार में जन स्वास्थ्य अनुसंधान की जरूरत और प्राथमिकताओं पर जोर दिया गया। देशभर से आए वैज्ञानिकों ने कहा कि मप्र में लोक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों-विशेषकर हेपेटाइटिस-सी और महिला मानसिक स्वास्थ्य पर सुनियोजित रिसर्च की जरूरत है। वैज्ञानिकों ने चिंता जताई कि भोपाल सहित प्रदेश में हेपेटाइटिस-सी संक्रमण तेजी से फैल रहा है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस अध्ययन नहीं हुआ है। कार्यक्रम के आयोजक डॉ. मुकुल मौर्या ने बताया कि चूंकि इसके लक्षण बहुत देर से सामने आते हैं, इसलिए यह साइलेंट किलर बन चुका है।

गंभीर वायरस इंफेक्शन के प्रति सचेत रहें

हेपेटाइटिस सी लीवर को खराब करने वाला एक वायरस इंफेक्शन है। इससे लिवर में सूजन और इंफेक्शन हो जाता है। गंभीर इंफेक्शन होने पर लीवर सिरोसिस, लीवर फेलियर और लीवर कैंसर जैसी गंभीर स्थिति बनती है। इसके प्रारंभिक लक्षणों में पेट दर्द होना, थकान और कमजोरी, पीलिया, आंखों और त्वचा का पीला पड़ना, स्टूल का गहरे भूरे रंग का होना, यूरिन का रंग गहरा हो जाना,भूख मर जाना और जी मिचलाना प्रमुख है। हेपेटाइटिस सी के लिए सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच और दवाएं उपलब्ध हैं।

महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर भी हो शोध

महिला स्वास्थ्य के विशेष सत्र में कामकाजी महिलाओं में बढ़ते मानसिक तनाव, अवसाद और चिंता विकारों पर चिंता जताई गई। डॉ.रीनू यादव ने कहा कि महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर कोई ठोस सर्वे अब तक नहीं हुआ है। सम्मेलन में यह भी बताया गया कि भोपाल जैसे प्रमुख शहर में प्रशिक्षित क्लिनिकल रिसर्च प्रोफेशनल्स की भारी कमी है।