
seed ball technique
अशोक गौतम, भोपाल. वन भूमि में अब पौधरोपण की जगह सीधे बीज से पौधे उगाए जाएंगे। देश में पहली बार प्रदेश का वन विभाग यह नवाचार करने जा रहा है। इस साल 50 लाख सीड बॉल (खाद-मिट्टी की गेंद) से पौधों के अंकुरण का लक्ष्य तय किया गया है। वन समितियां जनसहयोग से यह सीड बॉल तैयार कर रही हैं।
सीड बॉल को पहले से खोदे गए गड्ढों में डाल दिया जाएगा। बारिश में पौधे अपने आप उग आएंगे। इनकी सुरक्षा के लिए फेंसिंग भी कराई जाएगी। विभाग का दावा है कि इस पद्धति पर प्रति पौधा सिर्फ 20 पैसे की लागत आएगी। इस नवाचार की शुरूआत आदिवासी इलाकों से होगी। वन विभाग के अनुसार, वर्ष 2019 के लिए प्रदेश में पांच करोड़ रोपने का लक्ष्य है। 50 लाख पौधे सीड बॉल से तैयार किए जाएंगे।
खर्च में आएगी कमी
अभी नर्सरी में एक पौधे को तैयार करने में औसतन दस रुपए का खर्च आता है, लेकिन सीड बॉल 20 पैसे में तैयार हो जाएगी। पहले पौधों को पॉलीथिन में तैयार किया जाता था, लेकिन पॉलीथिन पर एनजीटी के प्रतिबंध के बाद इसका प्रभाव नर्सरियों में देखने को मिल रहा है। वहां पौधे सीड-ट्रे और कपड़े की थैलियों में तैयार किए जा रहे हैं। इस तरह से एक पौधा तैयार करने में वन विभाग को अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ती है। सीड बॉल का प्रयोग सफल हुआ तो खर्च में बड़ी कटौती करने में मदद मिलेगी।
ऐसे तैयार होगी सीड बॉल
सीड बॉल गीली मिट्टी और खाद से तैयार होगी। इसे गेंद की तरह बनाकर भीतर पांच से सात प्रजातियों के बीज डाले जाएंगे। मिट्टी की इस गेंद को धूप में सुखाकर भंडारित कर दिया जाएगा। बरसात शुरू होते ही वन क्षेत्र में पहले से तैयार गड्ढों में सीड बॉल को डालकर मिट्टी, बर्मी कंपोस्ट और गोबर की खाद से ढंक दिया जाएगा। नमी बढ़ते ही इनसे पौधे अंकुरित होंगे। सीड बॉल तैयार करने का काम वन समितियों, आदिवासियों और नर्सरियों को दिया गया है।
इस साल प्रदेश में सीड बॉल से भी पौधे तैयार करने का प्रयोग किया जा रहा है। शुरूआत 50 लाख सीड बॉल से की जा रही है। अगले साल और ज्यादा सीड बॉल तैयार की जाएंगी, क्योंकि पौधरोपण का यह सबसे सस्ता तरीका है।
- पीसी दुबे, एपीसीसीएफ वन अनुसंधान एवं विस्तार
Published on:
29 May 2019 10:38 am
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