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Sharad Purnima 2017 : चंद्रमा के अमृत में पकेगी खीर, इस खीर और चांदनी के ये फायदे नहीं जानते होंगे आप

आज शरदपूर्णिमा यानी शरदोत्सव के साथ मौसम बदलने लगेगा। जनजीवन की नई शुरुआत होगी...

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भोपाल। आज शरदपूर्णिमा यानी शरदोत्सव के साथ मौसम बदलने लगेगा। जनजीवन की नई शुरुआत होगी। हिन्दी पंचाग का आठवां और सबसे पवित्र ये महीना कार्तिक आज से ही शुरू हो जाएगा। यह व्रत त्योहारों के साथ जनजीवन में कई बदलाव लाता है। ऋतु के साथ लोगों का खान-पान, पहनावा बदलने लगेगा। इस माह शरद पूर्णिमा से कार्तिक मनाए जाएंगे। साल का सबसे बड़ा त्योहार दीपावली भी इसी माह मनाया जाएगा। पंडित अशोक कुमार शर्मा आपको बता रहे हैं शास्त्रों के मुताबिक शरदोत्सव का महत्व और अमृत में पकी खीर को खाने के फायदे...

* शरदोत्सव शैव शाक्त और वैष्णव तीनों सम्प्रदायों के लिए आध्यात्मिक महत्व का पर्व है। शाक्त सम्प्रदाय में आज शरद पूर्णिमा से कोजागरी लोक्खी यानी लक्ष्मी जी की पूजा व्रत शुरू होता है।
* इसमें सोलह दिन तक भगवती राजराजेश्वरी की पूजा आराधना की जाती है।
* नित्य 108 दीपक से भगवती की पूजा-अर्चना की जाती है।
* आज से कार्तिक स्नान भी शुरू हो जाएगे।
* महिलाएं ब्रम्ह मुहुर्त में उठकर तुलसी की पूजा, परिक्रमा, दीपदान, भजन कीर्तन करेंगी।
* दिन में एक बार तारों की छाव में भोजन करेंगी।
* कार्तिक मास में दीपदान का विशेष महत्व है।

शास्त्रों के मुताबिक

* शरद पूर्णिमा की रात का अगर मनोवैज्ञानिक पक्ष देखा जाए तो यही वह समय होता है जब मौसम में परिवर्तन की शुरुआत होती है और शीत ऋतु का आगमन होता है। शरद पूर्णिमा की रात में खीर का सेवन करना इस बात का प्रतीक है कि शीत ऋतु में हमें गर्म पदार्थों का सेवन करना चाहिए क्योंकि इसी से हमें जीवनदायिनी ऊर्जा प्राप्त होगी।

* दशहरे से शरद पूर्णिमा तक चंद्रमा की चांदनी विशेष गुणकारी, श्रेष्ठ किरणों वाली और औषधियुक्त होती है।
* कहा जाता है कि लंकाधिपति रावण शरद पूर्णिमा की रात किरणों को दर्पण के माध्यम से अपनी नाभि पर ग्रहण करता था। इस प्रक्रिया से उसे पुनर्योवन शक्ति प्राप्त होती थी।
* चांदनी रात में 10 से मध्यरात्रि 12 बजे के बीच कम वस्त्रों में घूमने वाले व्यक्ति को ऊर्जा प्राप्त होती है।
* सोमचक्र, नक्षत्रीय चक्र और आश्विन के त्रिकोण के कारण शरद ऋतु से ऊर्जा का संग्रह होता है और बसंत में निग्रह होता है।
* एक अध्ययन के अनुसार, दुग्ध में लैक्टिक अम्ल और अमृत तत्व होता है।
* यह तत्व किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है।
* चावल में स्टार्च होने के कारण यह प्रक्रिया और आसान हो जाती है।
* यही कारण है कि ऋषि-मुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर को खुले आसमान के नीचे रखने और अगले दिन खाने का विधान तय किया था। यह परंपरा विज्ञान पर आधारित है।

जानें वैज्ञानिक मत

* वैज्ञानिको का मत है कि इस रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है।
* इसकी किरणों में कई लवण और विटामिन आ जाते हैं।
* पृथ्वी से नजदीक होने के कारण ही खाद्य पदार्थ इसकी चांदनी को अवशोषित करते हैं।
* लवण और विटामिन से संपूर्ण ये किरणें हर खाद्य पदार्थ को स्वास्थ्यवर्धक बनाती है।

ऐसे बनाएं खीर

शरद पूर्णिमा की इस रात में चांदनी से बरसने वाला अमृत खीर को बेहद पौष्टिक बना देता है। इस खीर को बनाने के लिए जितना दूध है उसमें उतना ही पानी मिलाकर पहले उसे पकाएं। इसमे ंचावल धोकर डाल दें। अब खीर बनने दें। दूध को तब तक पकाएं जब तक कि उसमें मिलाया गया पानी उड़ जाए और केवल दूध और चावल ही बचे। खीर में चीनी और बादाम डालकर रात ९ बजे चंद्रमा की चांदनी में रख दें। अगले दिन भोर में ४-६ बजे के बीच इसे खाएं। इसे खाने से पहले ऊं नमो नारायणाय: मंत्र का २१ बार जप करें, अब ये खीर औषधि का काम करेगी। अब इसे खाएं और हमेशा के लिए स्वस्थ हो जाएं।

ऐसा करने से होगा लाभ

* आज कम से कम 30 मिनट तक चांद की चांदनी में रहें।
* रात 10 से 12 बजे तक का समय इसके लिए बेहद उपयोगी बताया गया है।
* शरद पूर्णिमा की रात दमा रोगियों के लिए वरदान बनकर आती है।
* दमा पीडि़तों को इस रात सोना नहीं चाहिए, बल्कि जागरण करना चाहिए।
* इस रात्रि में दिव्य औषधि को खीर में मिलाकर उसे चांदनी रात में रखकर सुबह 4 बजे सेवन किया जाता है।
* रोगी को रात्रि जागरण करना पड़ता है और औषधि सेवन के बाद 2-3 किमी पैदल चलना लाभदायक रहता है।
* आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए दशहरे से शरद पूर्णिमा तक हर रोज रात में 15 से 20 मिनट तक चंद्रमा को देखकर त्राटक करें ।
* जो इन्द्रियां शिथिल हो गई हैं, उन्हें स्वस्थ करने के लिए चंद्रमा की चांदनी में रखी खीर खाएं।