
sharbati wheat
भोपाल. आमतौर पर जिस चीज की बाजार में मांग और कीमत (sharbati gehu price) ज्यादा होती है, उसकी पैदावार में किसान ज्यादा रुचि लेते हैं। पर मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) की खास पहचान वाले गेहूं शरबती के मामले में यह ठीक उल्टा है। इसका बड़ा कारण है कि सबसे अच्छी क्वालिटी का शरबती गेहूं बिना सिंचाई के पैदा होता है। सिंचाई करने से शरबती गेहूं की क्वालिटी घट जाती है। प्रदेश में बीते कुछ वर्षों में सिंचाई के साधनों में वृद्धि हुई है, सिंचित रकबा बढऩे से अब किसान का फोकस ज्यादा उत्पादन पर रहता है इसलिए इस विश्व प्रसिद्ध गेहूं का रकबा लगातार घट रहा है। किसान शरबती की जगह दूसरी फसल या गेहूं की ही कोई दूसरी वैरायटी की बुवाई कर रहे हैं। पहले अधिकांश किसान शरबती ही पैदा करते थे, अच्छे भाव मिलते थे। पर दूसरी किस्मों का उत्पादन तीन गुना तक है। शरबती एक बीघा में अधिकतम छह क्विंटल और दूसरी किस्म जैसे 322 से 12 और कुछ निजी कंपनियों का हाइब्रिड बीज 19 क्विंटल उत्पादन है। शरबती में कम पानी और न के बराबर खाद की जरूरत होती है। यही वजह है कि बड़ी कंपनियां इस गेहूं को जैविक गेहूं बताकर भी निर्यात करती हैं।
एक खास स्वाद, सोने जैसी चमक और एक समान दाने से खास पहचान बनाने से सीहोरी गेहूं (Sehori gehu) बड़ी कंपनियों में भी लोकप्रिय है। 500 साल पुरानी इस किस्म का अब असल स्वाद वाला शरबती का गढ़ अशोकनगर (Ashok nagar) बन रहा है। अशोकनगर के कृषि एसएडीओ मुकेश रघुवंशी के मुताबिक जिले के शरबती गेहूं के अच्छे होने के तीन कारण है। पहला यहां उर्वरक कम मात्रा में डाला जाता है, दूसरा एक सिंचाई करते हैं और तीसरा जमीन की गहरी मिट्टी है, पोटाश की मात्रा ज्यादा है और अन्य जिलों की तुलना में जमीन से माइक्रो न्यूट्रिएंट सीधे मिल जाते हैं और केमिकल डालने की जरूरत नहीं पड़ती।
जितनी ज्यादा सिंचाई चमक उतनी कमजोर
देश में गेहूं की सबसे प्रीमियम किस्म शरबती ही है। इसे 'द गोल्डन ग्रेन' भी कहा जाता है, इसका रंग सुनहरा होता है। यह हथेली पर भारी लगता है और इसका स्वाद मीठा होता है। शरबती में गेहूं की दूसरी किस्मों की तुलना में ग्लूकोज और सुक्रोज जैसे सरल शर्करा की मात्रा अधिक होती है। एक से ज्यादा सिंचाई करने से शरबती की चमक फीकी पड़ जाती है। एक से ज्यादा सिंचाई करने पर यूरिया खाद भी ज्यादा देना पड़ेगा। इससे गेहूं में केमिकल की मात्रा बढ़ जाती है।
सीधे खेत का सौदा
शरबती गेहूं का बाजार इतना अच्छा है कि मंडी के अलावा सॉरटैक्स प्लांट चलाने वाले व्यापारी सीधे ही किसानों से संपर्क करके भी शरबती गेहंू की खरीद कर लेते हैं। प्लांट से एक साइज के दानों को पैकेटों में पैक कर अन्य प्रदेशों में भेजा जाता है। बगुल्या गांव का गेहूं का बेस्ट क्वालिटी की चमक बेस्ट होता है। 2018 में आष्टा मंडी में शरबती गेहूं 4701 रुपए क्विंटल तक बिका था। इस बार सीहोर में अधिकतम भाव 5200 रुपए प्रति क्विंटल है।
यूं घटा शरबती का रकबा
जिला वर्ष 2011-12 वर्ष 2021-22
अशोकनगर 100000 60000
सीहोर 50000 35610
विदिशा 120000 30000
(नोट: गेहूं का रकबा हेक्टेयर में)
पानी की उपलब्धता बढ़ी है
किसानों के पास पानी की उपलब्धता बढ़ती जा रही है, जिसके कारण वह अधिक उत्पादन वाली गेहूं की वैरायटियों की बोवनी कर रहे हैं। शरबती का उत्पादन 10 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ है, जबकि दूसरी वैरायटी 25 से 30 क्विंटल तक उत्पादन दे देती हैं।
रामशंकर जाट, डीडीए सीहोर
Updated on:
11 Mar 2022 03:16 pm
Published on:
11 Mar 2022 03:02 pm
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