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80% महिलाओं के पास नहीं है मैरिज सर्टिफिकेट, ये है बड़ा कारण

MP News: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मुताबिक, प्रदेश की करीब 80 प्रतिशत महिलाओं के पास विवाह का कानूनी प्रमाण पत्र नहीं है, क्योंकि शादियां सामाजिक रीति-रिवाज से हुईं, पंजीयन नहीं कराया गया।

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marriage certificate

marriage certificate (Photo Source - Patrika)

MP News:मध्यप्रदेश में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की डिजिटल निगरानी के लिए शुरू किया गया आरसीएच पोर्टल 2.0 जमीनी स्तर पर कागजी अड़चनों में उलझ गया है। सरकार की योजना है कि हर गर्भवती महिला को वन नेशन-वन आइडी से जोड़ा जाए (यूनिक आइडी), ताकि गर्भावस्था की शुरुआत से लेकर प्रसव और टीकाकरण तक की पूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज हो सके।

इससे हाईरिक्क प्रेग्नेंसी की समय रहते पहचान कर मातृ-शिशु मृत्यु दर घटाने का लक्ष्य है। लेकिन यूनिक आइडी बनाने के लिए आधार, समग्र आइडी, मोबाइल नंबर और विवाह प्रमाण पत्र अनिवार्य होने से बड़ी संख्या में महिलाओं का पंजीयन अटक गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मुताबिक, प्रदेश की करीब 80 प्रतिशत महिलाओं के पास विवाह का कानूनी प्रमाण पत्र नहीं है, क्योंकि शादियां सामाजिक रीति-रिवाज से हुईं, पंजीयन नहीं कराया गया।

जमीनी हकीकत, आधा समय ऐप में, आधा कागज में…

अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर सिर्फ पोषण पंजी नहीं भर रहीं, बल्कि मोबाइल ऐप पर डेटा अपलोड भी कर रही हैं। एक कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, दस्तावेज अधूरे होने से यूनिक आइडी नहीं बनती। कई बार नेटवर्क नहीं मिलता, ऐप एरर दिखाता है। असली काम से ज्यादा समय कागजी कार्रवाई में चला जाता है।

प्रदेश में गर्भवती महिलाओं को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पहली संतान के लिए 5,000 (दो किस्तों में) और दूसरी संतान बालिका होने पर 6,000 की राशि सीधे बैंक खाते में दी जाती है। पहली किस्त 1,000 (गर्भावस्था के पंजीकरण पर), दूसरी किस्त 2,000 (कम से कम एक प्रसव पूर्व जांच के बाद), तीसरी किस्त 2,000 (बच्चे के जन्म का पंजीकरण और टीकाकरण पूरा होने पर)।

महिलाओं को आ रही परेशानी

रीना (7 माह गर्भवती)- शादी को पांच साल हो चुके, लेकिन मैरिज सर्टिफिकेट नहीं। समग्र आइडी बनवाने नगर निगम के चक्कर लगा रही हैं। दलाल पैसे मांगते हैं। दस्तावेज अधूरे होने से उनकी आभा आइडी भी नहीं बनी। अस्पताल में पंजीयन और जांच में दिक्कत आ रही है।

शबाना (दूसरी संतान, ग्रामीण क्षेत्र)- नेटवर्क की समस्या के कारण हमारा डेटा अपलोड नहीं हो पा रहा। प्रसव पूर्व जांच हो चुकी, लेकिन पोर्टल पर इसकी एंट्री न होने से दूसरी किस्त जारी नहीं की गई। परेशानी यह है कि उन्हें बारबार आंगनबाड़ी केंद्र के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

सरिता (पहली संतान)- गर्भावस्था पंजीयन तो हुआ, लेकिन विवाह प्रमाण पत्र न होने से यूनिक आइडी जनरेट नहीं हुई। परिणामस्वरूप प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की पहली किस्त 5,000 रुपए अटक गई। परिवार आर्थिक तंगी में है।