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हिम्मत हारना सबसे बड़ी हार, इसलिए अंदर से ना हारें: शास्त्री

नीलकंठेश्वर शिव दुर्गा मंदिर में शिव महापुराण कथा

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हिम्मत हारना सबसे बड़ी हार, इसलिए अंदर से ना हारें: शास्त्री

भोपाल। जीवन में हम दो लड़ाई लड़ते हैं। एक हमारे अंदर चलती है और दूसरी बाहर। आप हष्ट पुष्ट हैं, तो बाहर से आपको कोई नहीं हरा सकता। अंदर से हारे तो सदा हारते रहते हैं। परमात्मा के प्रति जब तक आपका विश्वास है, तब तक दुनिया की कोई भी आंधी आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकती।

यह बात नीलकंठेश्वर शिव दुर्गा मंदिर ईदगाह हिल्स में शिव महापुराण के चौथे दिन आचार्य पंडित ओम कृष्ण शास्त्री ने कहा। उन्होंने कहा कि एक राजा ने सपना देखा कि मैं युद्ध में हार गया। उसने अपनी रानी से कहा कि मैंने एक बुरा सपना देखा कि मैं युद्ध में हार गया। रानी ने कहा कि मैंने भी आज ही इससे भी बुरा सपना देखा कि आप हिम्मत हार गए हैं।

हिम्मत हारना ही सबसे बड़ी हार है। बागीचे में कंाटों को बचाकर ही गुलाब तोड़ते हैं। जीवन की सडक़ समतल नहीं है। कहीं फूल, कहीं कांटे और कहीं ठोकर मिलती ही है, तब हम प्रभु को पुकारें और उनके लिए ही रोएं, इसी से हमें राहत मिलेगी। संसार में दुख आए ही नहीं, यह संभव नहीं है।

संसार के तमाम दुख रूपी कांटों से हिम्मत नहीं हारना चाहिए। आचार्य शास्त्री ने कहा कि शिव महापुराण की यही सीख है कि अंदर की लड़ाई साधन.भजन से जीतें। भगवान भक्तों के लिए कभी दरवाजे बंद नहीं करते, हमेशा वह खुला रखते हैं।

भूत, प्रेत के साथ निकली शिव बारात

पिपलेश्वर महादेव मंदिर पुल पुख्ता में चल रही नौ दिवसीय राम कथा में शनिवार को शिव विवाह प्रसंग की प्रस्तुति हुई। इस मौके पर आकर्षक शिव बारात निकाली गई। इसमें श्रद्धालु भूत, प्रेत के वेष में शामिल हुए और जमकर नृत्य किया। इस मौके पर कथावाचक वेंकटेश महाराज ने कहा कि शिव ने श्री राम की भक्ति आम भक्त की तरह की। जैसे हम लोग भगवान को भोग लगाते हैं, नाम जपते हैं, भव्य रूप के दर्शन करते हैं, वैसे ही शिव ने श्री राम के दर्शन के लिए बहुत तप किया। महाराज ने कहा युवाओं को भी कथा का श्रवण करना चाहिए क्योंकि युवाओं के कंधे पर ही देश का भार है। जितना भक्ति का तप होगा उतना ही हमें फल मिलेगा। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।