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इलाज से लौटी तेंदुए की याददाश्त, अब शुरू किया दहाड़ना और गुर्राना

जंगली और खूंखार जानवर की ऐसी स्थिति देख देखने वाले यही कयास लगा रहे थे कि यह पालतू तेंदुआ होगा, लेकिन जब वन विभाग की टीम ने घटना स्थल पर जाकर तेंदुए को पकड़ा और जांच के लिए भेजा तब पता चला कि तेंदुआ दरअल अपनी याददाश्त भूल चुका था। लेकिन खुशखबरी अब यह है कि इलाज शुरू होते ही तेंदुए की सेहत अब सुधरने लगी है।

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देवास के इकलेरा गांव में 18 दिन पहले काली सिंध नदी किनारे एक तेंदुए को ग्रामीणों की भीड़ ऐसे ट्रीट कर रही थी जैसे वो खूंखार जानवर तेंदुआ नहीं बल्कि भेड़-बकरी हो। उसके साथ वीडियो बना रहे थे, सेल्फी ले रहे थे। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और वन विभाग की टीम के पास भी पहुंचा था। जंगली और खूंखार जानवर की ऐसी स्थिति देख देखने वाले यही कयास लगा रहे थे कि यह पालतू तेंदुआ होगा, लेकिन जब वन विभाग की टीम ने घटना स्थल पर जाकर तेंदुए को पकड़ा और जांच के लिए भेजा तब पता चला कि तेंदुआ दरअल अपनी याददाश्त भूल चुका था। लेकिन खुशखबरी अब यह है कि इलाज शुरू होते ही तेंदुए की सेहत अब सुधरने लगी है।

यहां जानें कैसे याददाश्त खो बैठा था... अब दहाड़ रहा, गुर्रा रहा है तेंदुआ

आपको बता दें कि ग्रामीणों ने याददाश्त भूले इस तेंदुए को बहुत परेशान किया, कोई उसके साथ सेल्फी लेता रहा, तो एक व्यक्ति ने तो उसकी पीठ पर बैठने की भी हिमाकत कर दी थी, लेकिन तेंदुए का इस पर कोई रिएक्शन ही नहीं था। लेकिन समय पर इलाज मिलने के कारण तेंदुआ अब स्वस्थ हो रहा है। अब उसने दहाडऩा और गुर्राना शुरू कर दिया है। यानी उसकी याददाश्त लौट आई है। अब उसके पास जाना तो दूर कोई उसके पास जाने की बात के बारे में सोचने की गुस्ताखी भी नहीं कर पा रहा। उसकी देखभाल कर रहे कर्मचारियों ने उसे रामू नाम दिया है। अब स्थिति यह है कि तेंदुए के लिए पिंजरा छोटा पड़ गया। उसके एग्रेसिव होने से पिंजरा छोटा पड़ा और उसके सिर पर चोट लग गई। अब उसके लिए बड़ा पिंजरा बनवाया जा रहा है।

इस वायरस ने बिगाड़ी दिमागी हालत

आपको बता दें कि तेंदुए की जांच में सामने आया कि कुत्ते में पाया जाने वाला वायरस उसके ब्लड सेंपल में मिला। इस वायरस ने उसकी दिमागी हालत को प्रभावित किया। इंदौर चिडिय़ाघर ने उसे लाइलाज बताकर 5 सितंबर को सोनकच्छ भेज दिया था। यहां वन अमले ने परिवार की तरह उसे रखा। इलाज, भोजन, रहन-सहन की निगरानी की।

ऐसे लौटी याददाश्त

सोनकच्छ आने के बाद रामू ने पहले सप्ताह तक सिर्फ पानी ही पीया। टीम ने धीरे-धीरे आहार देना शुरू किया। गुरुवार को 1 किलो तो शुक्रवार को 2 किलो चिकन खाया। अच्छे खान-पान से उसकी सेहत सुधरने लगी। वह अपने मूल स्वभाव के अनुसार अब आक्रामक हो रहा है। अब हालत यह है कि 10 लोग मिलकर भी उसे स्लाइन नहीं चढ़ा पा रहे हैं। छोटे पिंजरे और तेंदुए के सिर में चोट को देखते हुए नया पिंजरा बनवा रहे हैं। अभी पिंजरा 6.3 फीट लंबा और 4 फीट चौड़ा है। नया पिंजरा 8 फीट लंबा और 5 फीट चौड़ा बनाया है। कुछ दिन रामू इसी में रहेगा। सोभाल सिंह भाटी,डिप्टी रेंजर, वन विभाग