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पगड़ी लगाकर बच्चे बने नन्हें सरदार तो देखकर भाव विभोर हो गए अभिभावक

- गुरुद्वारा नानकसर हमीदिया रोड में दस्तारबंदी कार्यक्रम में 2 से 6 साल के बच्चों ने बनाया सिखी स्वरूप

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पगड़ी लगाकर बच्चे बने नन्हें सरदार तो देखकर भाव विभोर हो गए अभिभावक

भोपाल. कोई अपने हाथ से पगड़ी बना रहा था, तो कोई आइने में देख रहा था, माता पिता भी अपने बच्चों की मदद कर रहे थे, और उनका स्वरूप देखकर खुशी जता रहे थे। नन्हें बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए परिजन भी पूरी शिद्दत के साथ उन्हें तैयार करने में अपनी भूमिका निभा रहे थे। कोई कुर्ता पैजामा पहनकर तो कोई टीशर्ट, जिंस पहनकर पगड़ी बांधे हुआ था और पूरे गुरुद्वारा परिसर में नन्हें सरकार नजर आ रहे थे।

यह नजारा था हमीदिया रोड स्थित गुरुद्वारे में आयोजित दस्तारबंदी कार्यक्रम का। इसमें नन्हें बच्चों के सिखी स्वरूप के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम दो से 12 साल तक के 100 से अधिक बच्चों ने भाग लिया।

कई अभिभावक अपने बच्चों को घर से सिखी स्वरूप में तैयार कर लाए थे, तो कई लोग गुरुद्वारे में तैयार कर रहे थे। इस प्रतियोगिता का आयोजन अलग-अलग ग्रुप में किया जा रहा है। बुधवार को बच्चों के लिए यह कार्यक्रम था, जबकि गुरुवार को ६ से १२ साल तक के बच्चों के लिए यह कार्यक्रम किया जाएगा।

बच्चों को सिख परम्पराओं से जोडऩे की पहल

गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के ज्ञानी दिलीप सिंह ने बताया कि गुरुद्वारे में हर साल यह आयोजन किया जाता है। इसके पीछे उद्देश्य यहीं है कि बच्चे और युवा हमारे परम्परा, हमारी संस्कृति के बारे में जाने, और इसे आगे बढ़ाए। भावी पीढ़ी देश और समाज की रीढ़ है, इसलिए इनका संस्कारित होना आवश्यक है।

अगर हम बचपन से ही बच्चों में यह संस्कार डालेंगे तो बच्चे भी उन्हें अपनाएंगे। पगड़ी सिख की शान होती है, लेकिन युवा इसे बोझ न समझे इसलिए हम बचपन से ही बच्चों को इसके महत्व के बारे में बताते हैं, और पगड़ी पहनने के लिए प्रेरित करते हैं। इसके अलावा इस शिविर में हम बच्चों को कीर्तन सुनाते हैं, अरदास में बच्चे शामिल होते हैं और दो से १२ साल तक के बच्चों को गुरमुखी शिक्षा दी जाती है।

विजेता बच्चों को मिलेगा इनाम

इस कार्यक्रम और गुरमत सिखिया शिविर के तहत अनेक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया है, ताकि बच्चे प्रेरित हो। इसके तहत सिख धर्म और परम्परा से जुड़े 326 सवाल की प्रतियोगिता रखी थी, इसमें 13 से 25 साल के युवाओं ने भाग लिया।

इसके तहत 250 सवालों का सही जवाब देने वाले विद्यार्थी को 21 हजार रुपए का इनाम दिया जाएगा, इसी प्रकार 225 सवाल के जवाब बताने वाले को 11 हजार, 200 सवाल के जवाब बताने वालो को 5100 रुपए दिए जाएंगे। इसके अलावा जो 100 सवाल के जवाब देंगे उन्हें गोल्डन टेंपल अमृतसर सहित 14 गुरुद्वारों के दर्शन के लिए नि:शुल्क ले जाएंगे।

स्वरूप देखकर अभिभावक हुए खुश

अपने बच्चों को सिख वेषभूषा में देखकर परिजन काफी खुश नजर आए। 3 साल के धैर्यवीर सिंह को पगड़ी और कृपाल के साथ देखकर उनकी मां रखविंदर कौर ने कहा कि इसे देखकर मैं काफी खुशी का अनुभव कर रही हूं। बच्चों को संस्कारित करना माता पिता का ही काम होता है।

जैसमीरा सिंह अपनी मौसी मनदीप कौर के साथ आई थी, उन्होंने कहा कि जैसमीरा केजी 1 की स्टूडेंट है। हम सब लोग काफी खुश है और उसे तैयार , यहा लाना बहुत अच्छा लगा, आज हमे अपना बचपन याद आ गया।