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स्मार्टसिटी ने डेढ़ करोड़ खर्च कर बनाया, टीएंडसीपी का भोपाल मास्टर प्लान में शामिल करने से इंकार

डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर तैयार किया प्लान ठंडे बस्ते में...

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smart city Jaipur

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भोपाल@देवेंद्र शर्मा की रिपोर्ट...

स्मार्टसिटी डेवलपमेंट कारपोरेशन का डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर तैयार किया गया ग्रीन एंड ब्ल्यू मास्टर प्लान जमीन पर उतरने के पहले ही ठंडे बस्ते में चला गया।

दरअसल स्मार्टसिटी ने अपने निजी कंसलटेंट्स की मदद से तैयार कराए ग्रीन एंड ब्ल्यू मास्टर प्लान के कई प्रावधानों को टीएंडसीपी ने अपने अनुरूप नहीं पाया।

अब जब तक नया मास्टर प्लान तैयार नहीं हो जाता, स्मार्टसिटी के ग्रीन एंड ब्ल्यू मास्टर प्लान को जमीन पर नहीं उतारा जा सकता। दरअसल स्मार्टसिटी के ग्रीन एंड ब्ल्यू मास्टर प्लान में पार्कों के पुननिर्माण, ग्रीन बिल्डिंग, पानी के बहाव, ग्रीन कॉरीडोर, सीवेज नेटवर्क जैसे मामलों पर आपत्ति है।

नया प्लान बनेगा और उसमें जो प्रावधान तय होंगे, उसके अनुसार बदलाव कर ग्रीन एंड ब्ल्यू मास्टर प्लान लागू करना होगा।


ग्रीन एंड ब्ल्यू मास्टर प्लान का उद्देश्य शहर का एक समान योजनाबद्ध तरीके से विकास के साथ ही शहरी सुविधाओं- सेवाओं में पर्यावरणीय स्थिति देखकर काम करने की बात है। भोपाल मास्टर प्लान का उद्देश्य भी यही है, ऐसे में दोनों में टकराव की स्थिति बन रही है।

ये प्रावधान भोपाल के मास्टर प्लान से टकरा रहे, करना होगा इंतजार

- 2036 तक भोपाल में 100 ग्रीन बिल्डिंग का प्रावधान। इसके लिए नियम और स्थान मास्टर प्लान में तय होंगे।
- भोपाल में पैदल यात्री और साइकिल चालक के लिए 153.02 किमी के ग्रीन कॉरिडोर नेटवर्क का प्रस्ताव। पायलट प्रोजेक्ट्स के अंतर्गत कालियासट नहर कॉरिडोर, जहांगीराबाद कॉरिडोर और मोतिया तालाब, बडा बाग कॉरिडोर को चुना गया हैं। भोपाल मास्टर प्लान में इसे तय करेंगे तभी काम बढ़ेगा।

- पानी के बहाव को रोकने और शहरी इलाकों में बाढ़ को कम करने के लिए प्रस्ताव। कलियासोत, जहांगीराबाद, लाहरपुर, लाहरपुर नाला, हताईखेड़ा, अपर लेक और पतरा नाला शामिल हैं। कुल 10.6 स्क्वायर किलोमीटर का क्षेत्र प्रस्तावित है। इसे भी मास्टर प्लान तक इंतजार करना होगा।
- सस्टेनेबल ड्रेनेज सिस्टम से डाउनस्ट्रीम प्रवाह को कम करने और बाढ़ के जोखिम को कम करने के लिए प्रवाह दर का प्रबंधन करने का प्रावधान।

अभी ये काम जारी रखे जा सकेंगे

- ऊर्जा की मांग को घटाने, ऊर्जा दक्षता में वृद्धि और ईंधन के साफ मोड का प्रयोग बढ़ाने कई प्रोजेक्ट प्रस्तावित।
- सौर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहन हेतू बैटरी को प्रमाणित करने की सुविधा विकसित करना।

- बिल्डिंग एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से बिल्डिंग की ऊर्जा आवश्यकताओं को मॉनिटर और नियंत्रित करने का प्रसताव।
- नगर निगम क्षेत्र में चयनित 33 कम कार्यक्षमता वाले पंपों की कार्यक्षमता बढ़ाने का प्रावधान है। जैसे राजाजी का कुआं पम्पिंग स्टेशन, ईदगाह डब्ल्यूटीपी, बैरागढ़ डब्ल्यूटीपी, याट क्लब, बैरागढ़ रॉ वाटर, ओल्ड बैरागढ़ नई डब्ल्यूटीपी, कमला पार्क और फ तेहगढ, बादल महल में पॉवर फैक्टर में सुधार करने के लिए कैपेसिटर बैंक की स्थापना की जानी है।

- डिसेंट्रलाइज्ड वेस्ट वाटर मैनेजमेंट सिस्टम के तहत सीवेज के उपचार एवं इसके फिर से उपयोग को सुनिश्चित करता है। परियोजना के तहत आकृति इको सिटी, मिसरोद, चिनार फ ॉच्र्यून सिटी, मीनाक्षी प्लेनेट सिटी, बाग मुगलिया वार्ड, पेबल बे।

सार्वजनिक पार्कों के लिए पोल टॉप सोलर लाइट
बीएमसी के पार्कों और उद्यानों में स्ट्रीट लाइट के साथ सौर पैनल को लगाए जाने का प्रस्ताव हैं। दिन में उत्पन्न बिजली ग्रिड में भेजी जाएगी और संध्याकाल में ग्रिड से बिजली ली जाएगी। 1720 लाइट पोल्स 300 पोल टॉप सौर पैनलों के साथ फि ट किया जा सकता है।

भोपाल मास्टर प्लान पर तो काम चल ही रहा है। कई प्रावधान शामिल और हटाने की कवायद है। इसमें ग्रीन ब्ल्यू मास्टर प्लान भी प्रभावित हो सकता है।
- सुनीता सिंह, संयुक्त संचालक टीएंडसीपी


स्मार्टसिटी का ग्रीन एंड ब्ल्यू मास्टर प्लान क्रियान्वयन को लेकर संबंधित विभागों से पूरा सहयोग लिया जाएगा। भोपाल मास्टर प्लान के प्रावधानों के अनुसार ग्रीन एंड ब्ल्यू को लागू किया जाएगा।

- ओपी भारद्वाज, सिटी इंजीनियर स्मार्टसिटी डेवलपमेंट कारपोरेशन