26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बारिश के मौसम को देख स्मिता ने सितार पर सुनाया राग मेघ

-रामकृष्ण आश्रम में चल रहे संगीत समारोह की सातवीं सभा में स्मिता नागदेव का सितार वादन

2 min read
Google source verification
news

बारिश के मौसम को देख स्मिता ने सितार पर सुनाया राग मेघ

भोपाल। रामकृष्ण मिशन आश्रम में शनिवार शाम जब इंटरनेशनल फेम सितार वादक स्मिता नागदेव ने 500 साल पुराना बारिश के मौसम का राग राग मेघ सुनाया तो तो श्रोता आनंद की बूंदों से सराबोर हो गए। रामकृष्ण मिशन आश्रम में चल रहे 15 दिवसीय गुरु पूर्णिमा संगीत समारोह की सातवीं सभा में यह सितार वादन की प्रस्तुति हुई। स्मिता नागदेव ने राग मेघ को विस्तार के साथ परंपरागत रूप से पेश किया। इसकी शुरुआत आलाप से करते हुए जोड़ और झाला प्रस्तुत किया।

जैसे-जैसे राग अपने सम्पूर्ण रूप में आ रहा था, वैसे-वैसे श्रोता इसकी सुंदरता में खोते जा रहे थे। प्रस्तुति में आगे स्मिता ने सितार पर राम भजन पायो जी मैंने राम रतन धन पायो... बजाकर माहौल में भक्ति भाव का संचार किया। वहीं तबले पर संगत कर रहे अशेष उपाध्याय के साथ मध्य लय गत और द्रुत लय गत प्रस्तुत कर प्रस्तुति को विराम दिया।

इधर, भारत भवन में चल रहे आसपास शृंखला में शनिवार को गायन और बांसुरी वादन का आयोजन किया गया। युवा कलाकार शिखर श्रीवास्तव के गायन की प्रस्तुति दी। नीतेश मांगरोले के बांसुरी वादन से श्रोताओं का दिल जीता। कार्यक्रम की शुरुआत शिखर श्रीवास्तव के गायन से हुई। दोनों ही प्रस्तुतियों में युवाओं की प्रतिभा के अलावा गुरु की तालीम और रियाज भी नजर आ रहा था।

शिखर श्रीवास्तव ने अपनी प्रस्तुति के लिए सबसे पहले राग यमन का चयन किया। इसमें उन्होंने विलंबित में एक ताल का बड़ा ख्याल और त्रिताल में छोटा ख्याल पेश कर समां बांधा। इसके बाद राग मेघ मल्हार में अश्विना रांगड़ेकर की घनन घनन घटा घनघोर....बंदिश पेश की। अंत में उन्होंने एक ताल में मध्य लय की प्रस्तुति दी। उनके साथ सारंगी पर हनीफ हुसैन, तबले पर स्वप्निल बागुल और हारमोनियम पर माजिद लतीफ ने संगत दी।

बांसुरी और स्वरों से गूंजा सभागार

दूसरी प्रस्तुति नीतेश के बांसुरी वादन की रही, उन्होंने अपनी प्रस्तुति के लिए राग मिया मल्हार का चयन किया। विधिवत रूप से आलाप, जोड़ का वादन करते हुए नीतेश ने आगे मध्य लय तीन ताल में निबद्ध बंदिश की प्रस्तुति दी। बांसुरी के सुरीले स्वरों ने बारिश की शाम में आत्मीय आनंद का अनुभव कराया। वहीं अंत में पहाड़ी धुन बजाकर प्रस्तुति को विराम दिया। उनके साथ तबले पर मनोज पाटीदार ने संगत की।