भोपाल। आंगनबाडिय़ों के जिम्मे है कि वे हर छोटे-बड़े शहर, गांव, कस्बे में पहुंच कर बच्चों के भविष्य को चमकाने की कोशिश करें लेकिन जब आंगनबाडिय़ां ही अंधेरे में गुम होंगी तो बच्चों के भविष्य में चार चांद कहां से लगेंगे। आपको बता दें कि मप्र में आज भी 5 हजार से ज्यादा ऐसी आंगनबाडिय़ां हैं जो जरा सी बारिश में पानी से लबालब हैं और बिजली न होने के कारण अंधेरे में डूब गईं हैं।