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जनजातीय संग्रहालय : यशोधरा में वंदना-ध्रुपद गायन एवं नाटक स्वर्ण संहार का मंचन

...और मोक्ष प्राप्ति की राह पर निकल पड़ते हैं राजा ब्रह्मदत्त

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भोपाल। जनजातीय संग्रहालय में बुद्धत्व की कथाओं के रंग महोत्सव पर केंद्रित यशोधरा में वंदना-ध्रुपद गायन और नाटक स्वर्ण संहार का मंचन किया गया। पहली प्रस्तुति में सुरेखा कामले निकोसे ने अपने साथी कलाकारों के साथ गायन की शुरुआत पारंपरिक बुद्ध वंदना बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि... से की। यह पाली भाषा में रचित है।

इस वंदना में गौतम बुद्ध के त्रिशरण (बुद्ध, धम्मं, संघ तथा पंचशील, अहिंसा, अस्तेय, सत्य, अत्याभिचार एवं अपरिग्रह) स्वरूपों का नमन किया गया। इसके बाद भारतीय संगीत की सबसे पौराणिक तथा आध्यात्मिक शैली ध्रुपद द्वारा सूल ताल बंदिश गौतम शाक्य मुनि शुद्धोधन सुरज प्रस्तुत कर बुद्ध का नमन किया गया। द्रुपद की यह बंदिश पाली हिंदी में रचित है।

स्वप्न में आए मोर के लिए हठ करती है रानी

दूसरी प्रस्तुति में सुमन साहा के निर्देशन में मोर जातक पर आधारित नाटक स्वर्ण संहार का मंचन हुआ। इस नाटक के केंद्र में एक मोर है, जो दंडक वन के उत्तरी क्षेत्र में अपना जीवन व्यतीत कर रहा है। काशी वंश में महारानी को स्वर्ण मोर के संदर्भ में एक स्वप्न आता है और वो उसे पाने के लिए हठ करने लगती हैं। राजा निर्णय लेते हैं कि जो भी उस स्वर्ण मोर के बारे में बताएगा, उसे स्वर्ण मुद्राएं देकर पुरस्कृत किया जायेगा। इस बीच राजा और रानी की मृत्य हो जाती है और सातवीं पीढ़ी के राजा के रूप में ब्रह्मदत्त का राजभिषेक होता है।

ब्रह्मदत्त को स्वर्ण मोर के बारे में पता चलता है, तो वह भी उसे पकडऩे की योजना बनाता है। मंगलपुष्करणी झील के गर्भ से रथ निकालते ही स्वर्ण मोर अपने अभिशाप से मुक्त होकर रथ पर सवार हो एक नई यात्रा पर निकल पड़ता है। ब्रह्मदत्त अपने कुलगुरु से आज्ञा ले अपना पद त्याग कर एक वस्त्र ग्रहण कर अपने मोक्ष की प्राप्ति के लिए अपनी यात्रा प्रारंभ करते हैं।

नाटक बुद्धायन का मंचन आज

भोपाल के जनजातीय संग्रहालय में ‘यशोधरा’ बुद्धत्व की कथाओं के रंग महोत्सव में एक मई को शाम 4.30 बजे से जातक कथाओं की प्रासंगिकता पर आधारित व्याख्यान प्रो.सत्यदेव त्रिपाठी द्वारा संग्रहालय के सभागार में होगा। शाम 7 बजे से प्रीति झा तिवारी के निर्देशन में द राइजिंग सोसाइटी ऑफआर्ट एंड कल्चर के कलाकारों द्वारा नाटक बुद्धायन का मंचन किया जाएगा।

वहीं 2 मई को शाम 4.30 बजे से बुद्ध की जातक कथाएं एवं रंग संभावनाओं पर आधारित व्याख्यान डॉ. राधावल्लभ त्रिपाठी द्वारा संग्रहालय के सभागार में देंगे। शाम 7 बजे से अभिषेक गर्ग के निर्देशन में स्विच ऑन स्कवरी आर्ट आर्गेनाइजेशन के कलाकार नाटक जस संगत तस रंगत का मंचन करेंगे।

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