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Vyapam पीएमटी घोटाला : 12 आरोपियों में से 5 ने रीवा से बनवाए फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र

- सीमावर्ती जिलों से बने फर्जी दस्तावेज के कारण एसटीएफ ने जांच का दायरा उप्र और बिहार तक बढ़ाया - पीएमटी प्रवेश परीक्षा-2009 व 2010 में मप्र कोटे से प्रवेश लेकर डॉक्टर बनने वाले 3-3 आरोपियों पर दर्ज किया केस
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भोपाल

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Radheshyam Dangi

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Updated: 9 Feb 2020, 8:13 AM IST

भोपाल. स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने व्यापमं घोटाले से जुड़े 197 केस की जांच में अब तक 12 पीएमटी प्रवेश परीक्षा के मामले दर्ज किए हैं। यह सभी फर्जीमूल निवासी प्रमाण पत्र के मामले हैं। 12 में से 5 आरोपी डॉक्टरों के मूल निवासी प्रमाण पत्र रीवा की त्यौंथर तहसील से बनवाए।

एक ने सीधी की गोपद बनास तहसील से फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र बनवाया। जबकि चार आरोपी डॉक्टरों के फर्जी मूल निवासी सागर की गढ़ाकोटा, दतिया, अंबाह और टीकमगढ़ तहसील से प्रमाण पत्र बने। जांच में चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया है कि जिन आरोपियों के रीवा से फर्जी कागज बने, उनसे से अधिकांश का प्रवेश गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल में हुआ है।

एसटीएफ की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि सीमावर्ती जिले होने के कारण यहां एक रैकेट काम कर रहा था, जो फर्जी दस्तावेज बनवाने का काम करता है। इसके लिए अब एसटीएफ की जांच उप्र-बिहार तक पहुंच गई है। एसटीएफ का मानना है कि सीमावर्ती जिलों में इस तरह का फर्जीवाड़ा का रैकेट है, जो अब भी सक्रिय हो सकता है।

अन्य परीक्षाओं में भी फर्जी दस्तावेज की आशंका
एसटीएफ को आशंका है कि जिस तरह पीएमटी प्रवेश परीक्षा में सीमावर्ती जिलों से फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र बनवाकर पीएमटी प्रवेश परीक्षाओं में मप्र कोटे का लाभ लिया गया है, उसी तरह से मप्र लोक सेवा आयोग और व्यापमं की अन्य प्रवेश परीक्षाओं में भी फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि एसटीएफ को सौंपी गई शिकायतों की जांच ही वह कर रही है, लेकिन व्यापमं की अन्य परीक्षाओं में भी फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल किया गया होगा।

इन आरोपियों के बने फर्जी मूल निवासी
सौरभ सचान, बेनजीर शाह फारुकी, शिव सिंह, तीनों पीएमटी-2009 के अभ्यर्थी और आरोपी हैं। पंकज कुमार सिंह, विपिन कुमार सिंह और सुनील कुमार तीनों पीएमटी 2010 के अभ्यर्थी और आरोपी। इनमें से विपिन कुमार सिंह का गोपद बनास सीधी से प्रमाण पत्र बना था, बाकी के त्यौंथर से फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र बने।

वहीं, सीमा पटेल का गढ़ाकोटा सागर पीएमटी 2004, विकास अग्रवाल पीएमटी-2005 दतिया, सीताराम शर्मा 2009 अंबाह, दिवाशीष विश्वास 2007 पीएमटी का टीकमगढ़ से फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र बने हैं।

मनीष पांडेय, ने पीएमटी-2009 फर्जी मूल निवासी लगाकर जीएमसी में प्रवेश लिया, जबकि वे मूल रुप से गोरखपुर उप्र के हैं, वहीं विकास सिंह ने पीएमटी-2009 में फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र लगाकर जीएमसी में प्रवेश लिया जबकि आरोपी मूल रुप से चित्रकुट, उप्र का है। एसटीएफ ने इन सभी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।