
एम्स में इम्यूनोथेरेपी की मदद से दो स्टेज 4 कैंसर से ग्रसित मरीजों का सफल इलाज किया गया है। रेडियोथेरेपी विभाग के डॉक्टरों ने दो ऐसे मरीजों में इस प्रक्रिया को अपनाया जिनमें कीमोथेरेपी से लेकर कैंसर से बचाने वाली अन्य दवाओं ने काम करना बंद कर दिया था। ऐसे में मरीज में इम्यूनोथेरेपी से इम्यूनिटी को बढ़ा कर नए सिरे से इलाज शुरू किया गया। जिसके जरिए एक से डेढ़ साल में शरीर की इम्यूनिटी ने ही शरीर में मौजूद कैंसर सेल का नष्ट कर दिया। जिससे मरीजों को जीवन में एक नई आशा मिली है। बता दें, पांच साल पहले ही इस तकनीक से इलाज शुरू हुआ है। ऐसे में अभी इसकी क्षमता रिसर्च का विषय मानी जा रही है।
इनको दी गई इम्यूनोथेरेपी
केस एक - तीन साल पहले एक 7 साल के बच्चे में स्टेज 4 फेफड़ो के कैंसर की पुष्टि हुई थी। स्थिति इतनी खराब थी कि यह मस्तिष्क व बोन तक फैल गया था। इसमें कीमोथेरेपी से लेकर अन्य दवाओं का कोई लाभ नहीं हो रहा था। ऐसे में एक साल के ट्रीटमेंट के बाद बच्चे को इम्यूनोथेरेपी देनी शुरू की गई। इससे बच्चे के शरीर में इम्यूनिटी बढ़ने लगी और वही कैंसर सेल को नष्ट करने लगी। करीब एक से बच्चे स्वस्थ है।
केस दो - महिला मरीज स्टेज 4 ग्रासनली कैंसर से ग्रसित थी। कैंसर गर्भाशय के अंदर से बाहर तक फैल गया था। इसमें भी कोई इलाज की प्रक्रिया कारगर नहीं थी। मरीज में इम्यूनोथेरेपी कारगर पाई गई है। अब महिला की स्थिति भी पहले से बेहतर है।
क्या है इम्यूनोथोरेपी:
इम्यूनोथेरेपी में मरीज में इम्यूनिटी को बढ़ावा देने के वाली दवाएं दी जाती हैं। यह दवाएं विदेश से इंपोर्ट करनी होती है। यह विधि उनमें कारगर होती है जिनकी इम्यूनिटी पहले से ही स्ट्रांग होती है। साथ ही इसमें पारंपरिक उपचारों जैसे कीमोथेरेपी से होने वाले नकारात्मक प्रभावों से बचाव होता है। शरीर में कैंसर कारक और उसको नष्ट करने वाले दोनों सेल मौजूद होते हैं। इस थेरेपी में कैंसर को नष्ट करने वाले सेल को बढ़ावा मिलाता है और मरीज को लाभ मिलता है।
कई स्तरीय जांच जरूरी
रेडियोथेरेपी विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजेश पसरीचा ने बताया कि एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह के नेतृत्व में विभाग की टीम इस नई थेरेपी का प्रयोग कर रही है। मरीज की कई स्तरीय जांच के बाद ही इस थेरेपी का चुनाव किया जाता है।
Published on:
21 Feb 2024 09:51 pm
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