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ऐसी दास्तां जो आपके दिल को दर्द से भर देगी : रायसेन के राजा की बेटी को शेरशाह ने बना दिया था वैश्या…

------------------------- राजा की बेटी ने ऐसी जिंदगी जी, जो मौत से बद्दतर थी, फिर बीमार होकर मर गई, पूरे राज परिवार को शेरशाह ने किया था खत्म, उमा भारती ने रायसेन के किले की दास्तां बताई------------------------

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jitendra.chourasiya@भोपाल। सच ये दास्तां आपके दिल को दर्द से भर देगी। रायसेन का एक राजा, जो धोखे से मारा गया। राजा जिसने अपनी पत्नी की गर्दन इसलिए काट दी कि वह शेरशाह के सैनिकों की हवस का शिकार न बने। राजा जो अपने दो बेटों और अबोध बेटी को भी वहशियों से बचाने मारना चाहता था, लेकिन मार न सका। उससे पहले शेरशाह ने राजा को घेरकर मार दिया। फिर शेरशाह के जुल्म की दास्तां, वो भी ऐसी कि राजा के दोनों बेटों को ढूंढकर काट दिया। फिर उस छोटी बेटी राजकुमारी को वैश्या बनाकर रखा। राजकुमारी वैश्यालय में ही वैश्या बनकर रही, फिर बीमार होकर मर गई। दिल को दहलाने वाली ये दास्तां कोई कहानी नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के रायसेन के राजा की असल जिंदगानी है।
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इस दर्दभरी दास्तां को भाजपा की फायरब्रांड नेता उमा भारती ने गुरुवार को अपने ट्वीट के जरिए बयां किया है। इस दास्तां की शुरूआत पंडित प्रदीप मिश्रा के रायसेन किले के शिव मंदिर पर ताले के एपिसोड से होती है। उमा भारती ने इस पूरे एपिसोड पर किले के राजा की इस दास्तां को उजागर किया है। उमा ने गुरुवार को 11 ट्वीट किए। उमा ने अपने ट्वीट में लिखा कि रायसेन के इस किले के नाम से ही मेरे अंत: में हूक उठती है। लेखक अब्राहम अर्ली की किताब का हवाला देकर उमा लिखती है कि रायसेन के राजा पूरणमल शेरशाह सूरी के विश्वासघात के शिकार हुए। किले के चारों तरफ घेरा डालकर शेरशाह सूरी ने राजा पूरणमल से संधि कर ली, फिर रात में उनके परिवार व राजा पूरणमल को घेर कर मार डाला। राजा पूरणमल बहादुरी से लड़े, मरने से पहले उन्होंने अपनी पत्नी रानी रत्नावली के अनुरोध पर उनकी गर्दन काट दी ताकि वह वहशियों के शिकंजे में ना आ पावे, किंतु उनके दो मासूम बेटे एवं अबोध कन्या टेंट में एक कोने में दुबक गए, जहां से उनको इन वहशियों ने खींच कर निकाला। दोनों मासूम बेटे वहीं काट दिए गए और राजा पूरणमल की अबोध कन्या वैश्यालय को सौंप दी, जहां वह दुर्दशा का शिकार होकर मर गई।
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उमा ने लिखा कि जब भी मैं रायसेन के किले के आस-पास से गुजरी यह प्रसंग मुझे याद आता था और मैं बहुत दु:खी एवं शर्मिंदा होती थी। जब डॉ. प्रभुराम चौधरी के चुनाव प्रचार में मैंने व सीएम शिवराज सिंह ने रायसेन में एक साथ सभा की थी, तब मैंने रायसेन के किले की ओर देखते हुए यह बात कही थी कि इस किले को देखकर मुझे बहुत कष्ट होता है और आज जब हमारा भाजपा का झंडा इसके सामने फहरा रहा है तो कुछ शांति होती है। राजा पूरणमल के साथ हुई घटना नीचता, विश्वासघात एवं वहशीपन की याद दिलाती है। मुझे अपनी इस अज्ञानता पर शर्मिंदगी है कि मुझे उस प्राचीन किले में सिद्ध शिवलिंग होने की जानकारी नहीं थी। मैंने अपने कार्यालय से कहा था कि रायसेन जिला प्रशासन को 11 अप्रैल को मेरे वहां जल चढ़ाने की सूचना दें। जब मैं उस सिद्ध शिवलिंग पर गंगोत्री से लाया हुआ गंगाजल चढ़ाऊंगी तब राजा पूरणमल, उनकी पत्नी, उनके मार डाले गए दोनों मासूम बेटे व वहशी दुर्दशा की शिकार होकर मर गई अबोध कन्या और उन सब के साथ मारे गए राजा पूरणमल के सैनिक उन सबका मैं तर्पण करूंगी व अपनी अज्ञानता के लिए क्षमा मांगूंगी।
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