
Sealing the issue of new voter papers
बैतूल। भारत निर्वाचन आयोग से जारी होने वाले अधिकांश मतदाता परिचय पत्रों में व्यक्ति के नाम के साथ सरनेम नहीं लगा होने के कारण एक नाम जैसे कई मतदाताओं के परिचय पत्र होने के कारण दिक्कतें आ रही थी। इसे देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने डेमोग्राफी सिंगुलर एंट्री को लेकर निर्देश जारी किए हैं। जिससे मतदाता परिचय पत्रों में सरनेम जोड़े जाने को अनिवार्य कर दिया है। इसको लेकर स्थानीय निर्वाचन विभागों को अभियान चलाकर मतदाता परिचय पत्रों में सरनेम जोडऩे के आदेश जारी किए हैं। बताया गया कि अकेले बैतूल में 12 लाख से अधिक मतदाताओं के परिचय पत्र बनाए गए हैं। विभाग के मुताबिक करीब 65 प्रतिशत मतदाताओं के परिचय पत्रों में सरनेम नहीं जुड़ा है।
बीएलओ को किया नियुक्त
मतदाता परिचय पत्र में लोगों का सरनेम जोड़े जाने के लिए निर्वाचन आयोग ने अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। जिसके बाद स्थानीय निर्वाचन ने प्रत्येक बीएलओ को निर्देशित किया है कि वह अपने क्षेत्र के मतदाताओ से संपर्क करे और जिन मतदाताओं के परिचय पत्रों में सरनेम दर्ज नहीं हैं उनके सरनेम भी नाम के साथ जोड़ा जाए। वहीं मतदाता भी स्वयं फार्म 8 भरकर मतदाता परिचय पत्र में सरनेम जुड़वा सकता है। बताया गया कि जिले में करीब 65 प्रतिशत मतदाताओं के परिचय पत्रों में सिर्फ नाम भर दर्ज हैं उनमें सरनेम नहीं है। जिसके कारण एक ही नाम के कई लोग होने से दिक्कते आ रही है।
परिचय पत्र में इमेज की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश
निर्वाचन आयोग ने मतदाता परिचय पत्रों में मतदाता की जो फोटो रहती हैं उसकी गुणवत्ता सुधारने के निर्देश भी जारी किए हैं। बताया गया कि अधिकांश मतदाता परिचय पत्रों में जो फोटो हैं उनकी गुणवत्ता ठीक नहीं होने के कारण मतदाता का चेहरा स्पष्ट नजर नहीं आता है। जिसके कारण मतदाता की सही तरीके से पहचान नहीं हो पाती है। इसे देखते हुए ही निर्वाचन आयोग ने मतदाता परिचय पत्र में लगाई जाने वाली फोटो की गुणवत्ता में सुधार करने के निर्देश जारी किए हैं। वर्तमान में ऑनलाइन के माध्यम से मतदाता परिचय पत्र बनाने का काम किया जा रहा हैं। जिसमें मतदाता अपने आधार पर फोटो का चयन कर सकता है।
नए वर्जन ने बढ़ाई निर्वाचन की दिक्कतें
निर्वाचन आयोग ने नए साफ्टवेयरों में काम शुरू किया है। यह साफ्टवेयर विंडो 11 में ही काम करता है। हालांकि विंडो 10 में भी इसे चलाया जा सकता हैं लेकिन इससे कम्प्यूटर की स्पीड पर फर्क पड़ता हेै। जो स्थिति हैं उसमें स्थानीय निर्वाचन विभाग के पास विंडो 7 और विंडो 10 साफ्टवेयर वाले ही कम्प्यूटर मौजूद हैं। ऐसे में निर्वाचन के काम करने में बीएलओ सहित अन्य अमले को दिक्कतें आ रही है। अधिकांश कर्मचारियों को स्थानीय निर्वाचन कार्यालय में आकर काम करना पड़ रहा है। बताया गया कि जिले की सात तहसीलों में कम्प्यूटर निर्वाचन कार्य के लिए दिए गए हैं लेकिन इनमें विंडो 7 का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसके कारण साफ्टवेयर नहीं चलने से निर्वाचन का कार्य प्रभावित हो रहा है।
जिले में 12 लाख से अधिक मतदाता
बैतूल जिले में कुल पांच विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें कुल मतदाताओं की संख्या 12 लाख 3 हजार 832 बताई जाती है। इनमें पुरुष मतदाताओं की कुल संख्या 6 लाख 13 हजार 487 और महिला मतदाताओं की संख्या 5 लाख 90 हजार 318 है। वहीं जिले भर में 27 अन्य मतदाता बताए जाते हैं। बताया गया कि इनमें से करीब 65 प्रतिशत मतदाताओं के परिचय पत्रों में लोगों के सरनेम दर्ज नहीं है। जिसके कारण एक ही विधानसभा क्षेत्र में एक नाम जैसे कई मतदाता दर्ज हैं। इस वजह से कई बार चुनाव के दौरान दिक्कतें आती है।
इनका कहना
- डेमोग्राफी सिंगुलर एंट्री के संबंध में निर्वाचन आयोग ने निर्देश जारी किए हैं। जिसके चलते मतदाता परिचय पत्र में अब लोगों के सरनेम उपनाम दर्ज किए जा रहे हैं। ताकि मतदाता परिचय पत्र में एक जैसे नामों में भिन्नता आ सके।
- एसपी मंडराह, प्रभारी उप निर्वाचन अधिकारी बैतूल।
Published on:
26 Apr 2023 08:06 pm
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