भोपाल

स्वाइन फ्लू वायरस फैलने से हो रही मौत, जानिए इसके लक्षण और बचने के उपाय

स्वाइन फ्लू के संक्रमण को रोकने के लिए स्वाइन फ्लू के लक्षण जानना जरूरी है। स्वाइन फ्लू के लक्षण मिलते ही समय पर उपचार करा लेने से स्वाइन फ्लू के वायरस को कंट्रोल किया जा सकता है।

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May 01, 2019
swine flu symptoms in hindi

भोपाल. मध्यप्रदेश में स्वाइन फ्लू के संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा। गर्मी के मौसम में भी अस्पताल में स्वाइन फ्लू के मरीज देखने को मिल रहे। इस वजह से स्वाइन फ्लू के लक्षण और इनके उपचार जानना हमारे लिए जरूरी है। स्वाइन फ्लू के लक्षण मिलते ही समय पर उपचार करा लेने से स्वाइन फ्लू के वायरस को कंट्रोल किया जा सकता है।

राजधानी भोपाल में स्वाइन फ्लू से अब तक करीब 52 लोगों की मौत हो चुकी है। ये संख्या इंदौर के बाद भोपाल में सबसे ज्यादा है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रतिकूल मौसम में स्वाइन फ्लू को साफ-सफाई से रोका जा सकता है।

स्वाइन फ्लू के लक्षण

- बतलते मौसम में स्वाइन फ्लू के लक्षण मुख्यतः खांसी, गले में खराश और तेज बुखार के साथ शुरू होता है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति को बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, ठंड, दस्त और उल्टी के लक्षण दिखें तो स्वाइन फ्लू के लिए डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

स्वाइन फ्लू के बचाव

- स्वाइन फ्लू से बचने के लिए खांसी, जुकाम, बुखार के मरीज से दूर रहें। खाना खाने से पहले साबुन से अच्छी तरह हाथ धुलना चाहिए। खांसते, छींकते समय मुंह व नाक पर कपड़ा रखें।

स्वाइन फ्लू के घरेलू उपचार

- स्वाइन फ्लू की होने का आशंका में डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। लेकिन स्वाइन फ्लू से बचाने के लिए घरेलू नुस्खें भी उपयोग में लिया जा सकता है। इसमें काढ़ा सबसे अधिका फायदे मंद होता है। दूध में हल्दी का सेवन करने से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है।

- स्वाइन फ्लू जैसे बुखार गले में खराब, सर्दी-जुकाम, खांसी व कंपकंपी आना, इनमें से कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत अपने चिकित्सक से परामर्श लें।

- कपूर, इलायची, लौंग मिश्रण (पाउडर) को रूमाल में बांधकर रख लें व सूंघते रहें। इससे संक्रमण का खतरा कम होता है।

मौत की प्रमुख 3 वजह

- मरीज खुद देरी से अस्पताल आते हैं, तब तक संक्रमण फेफड़ों तक पहुंच जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक 48 घंटे में इलाज शुरू होना चहिए।

- दवा देने में डॉक्टर देरी करते हैं। मरीज के सी कैटेगरी में पहुंचने पर ही दवा दी जाती है और जांच होती है। विशेषज्ञों ने कहा कि बिना जांच भी दवा की शुरुआत करनी चाहिए।

- स्वाइन फ्लू का इलाज देर से शुरू होने की वजह जांच में कोताही भी है। सिर्फ सी कैटेगरी (गंभीर) के मरीजों के स्वाब के नमूने ही जांच के लिए भेजे जा रहे हैं।

Published on:
01 May 2019 01:11 pm
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