
तालाब के पानी में घुली बेतहाशा गंदगी, जिम्मेदार खामोश
भोपाल। राजधानी में तालाब के पानी में सीवेज का पानी मिलने और कचरे से अब तक मुक्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए कई योजनाएं तो शुरू हुई लेकिन सभी फेल साबित हुई। ऐसे में इनका पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है। जो तालाब में मौजूद जीव जंतुओं के लिए खतरा बन गया है।
शाहपुरा तालाब सीवेज टैंक में तब्दील हो गया। आसपास की अधिकांश कॉलोनी के नाले इसमें मिलते हैं। गंदे पानी के कारण कई यहां की कई मछलियां मर चुकी हैं। प्रवासी पक्षियों के लिए ये खतरा है। छोटे तालाब में बड़े क्षेत्र के आवासीय इलाके का सीवेज मिल रहा है।
कचरा लगातार फेंका जा रहा है जो सड़ रहा है। मोतिया तालाब में खाने का सामान फेंका जा रहा है। कई प्रवासी पक्षी इसे खा रहे हैं। आसपास धोबीघाट हैं। इसका पानी भी इसमें मिल रहा है। कई अस्पताल और पैथालॉजी लैब के इसके आसपास हैं। देखरेख की जिम्मेदारी नगर निगम की है। अधिकारी बात करने तैयार नहीं ।
आदेश का इंतजार ..
- ज्यादातर प्रवासी पक्षी तो बड़े तालाब के वन विहार क्षेत्र में आते हंै। उनकी देखरेख व सुरक्षा-सफाई की व्यवस्था वहां की जाती है। अन्य जल स्त्रोतों में वह जहां भी आते हैं तो उनकी सुरक्षा पर पर दस्ता नजर रखता है। तालाब के रख-रखाव आदि को लेकर अभी तो कोई आदेश जारी नहीं किए हंै।
- राजकरण चतुर्वेदी, रेंजर व प्रभारी उडनदस्ता, वन विभाग
माना पानी में केमिकल ...
ये सही है कि जहरीला व केमिकल युक्त पानी व खतरनाक कचरा से पक्षियों की जान जा सकती है। इन दिशा में वन विभाग बड़े तालाब में तो आने वाली प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा व पर्यटकों के आकर्षण को लेकर वर्ड वाचिंग कै म्प लगाते हैं। उनके क्षेत्र में पर्यटकों को कचरा फेंकने नहीं दिया जाता है। अन्य तालाबों की व्यवस्था स्थानीय शासन देखता है।
- एके जैन, उपसंचालक, वन विहार
Published on:
30 Nov 2019 08:45 am
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