
40 साल पुरानी सारंग पानी झील के अस्तित्व पर खतरा, अवैध मछलियां भी पल रहीं
भोपाल। भेल क्षेत्र की एक मात्र सारंग पानी झीेल के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। पिछले दो-तीन साल से झील में अवैध मछली पालन भी बढ़ गया है। साफ-सफाई का नाम तो दूर-दूर तक दिखाई नहीं देता। झील में हरी काई और गंदगी का अंबार है। समय रहते भेल प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया तो भेल की इस धरोहर को गंदे नाले में परिवर्तित होने से कोई नहीं बचा सकता। कुछ लोग तो इसके किनारे पर कपड़े भी धोने लगे हैं, पानी भी लगातार गंदा हो रहा है।
भेल बसने के बाद कभी सारंगपानी झील को इस क्षेत्र का पर्यटन स्थल भी कहा जाता था। यहां भेल में कार्यरत अधिकारी, कर्मचारियों के परिवार के अलावा बाहर के लोग भी आते थे। इसका नाम भी भेल के पहले डायरेक्टर के नाम पर सारंगपानी झील पड़ा था। दिन में तीन बजे के बाद यहां पर लोगों का तांता लग जाता था। देर शाम तक बच्चे भी खेला करते थे। लेकिन धीरे-धीरे अधिकारी बदले, इच्छा शक्ति के अभाव में झील की सफाई होना बंद हो गई। एक बार तो इसमें भेल कारखाने का गंदा पानी भी छोड़ दिया गया। भेल प्रबंधन को जब पता लगा तो उन्होंने इस पर रोक लगाई। अब काफी समय से झील की सफाई पर ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है। झील के दो किनारों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। अफसर भी यहां देखने के लिए नहीं जाते।
अवैध रूप से पाली जा रहीं मछलियां
झील में अब अवैध रूप से मछलियां भी पाली जा रही हैं। इस कारण यहां जाल भी डाला जाता है। पानी की गुणवत्ता भी पहले जैसी नहीं रही। अगर समय रहते भेल प्रशासन जागा नहीं तो आने वाले दिनों में भेल क्षेत्र की एक मात्र झील दम तोड़ देगी।
-40 साल पुरानी झील में अब अवैध रूप से मछली भी पाली जा रही हैं। इसका ध्यान रखना जरूरी है। वर्ना भेल क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर धीरे-धीरे दम तोड़ देगी।
आरडी त्रिपाठी, अध्यक्ष, मप्र इंटक
-झील में मछली पालने की जानकारी मुझे नहीं है, मैं पता कराता हूं। रहा सवाल साफ सफाई का तो हम लोग उसे साफ करवाते हैं।
राघवेंद्र, पीआरओ, भेल
Updated on:
01 Apr 2019 08:13 pm
Published on:
02 Apr 2019 12:02 am
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