
वाद्यों के खूबसूरत सवालों का, वाद्यों ने ही दिया जवाब
भोपाल। भारत भवन में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में चल रहे महिला रचनात्मकता पर केंद्रित समारोह अद्वितिया का शनिवार को समापन हो गया। अंतिम सभा में कलारसिकों को पांच वाद्यों का मेल-जोल देखने को मिला। शनिवार की खूबसूरत शाम में महिला वादकों को सुनना-गुनना शानदार अनुभव रहा।
पंच वाद्यों के सामुहिक वादन पंचनाद में संतूर पर श्रुति अधिकारी, वायलिन पर डॉ.एम.ललिता, मृदंगम पर लावण्या राजमणि, सितार पर स्मिता वाजपेयी और तबले पर मिताली विंचुरकर ने अपनी संगीत साधना का परिचय दिया। प्रस्तुति की शुरुआत के लिए राग किरवानी का चयन किया। आलाप के साथ राग को विस्तार देते हुए जोड़ की प्रस्तुति दी।
यह कर्नाटक संगीत से हिन्दुस्तानी संगीत में लिया हुआ राग है। इस राग का वाद्य संगीत में ज्यादा प्रयोग किया जाता है। चंचल प्रक्रुति का राग होने कि वजह से इसमे ठुमरी जैसी बंदिशें ज्यादा प्रचिलित हैं। इस प्रस्तुति में पांचो वाद्य एक साथ बजाए गए।
इसके बाद कर्नाटक स्टाइल में पल्लवी की प्रस्तुति दी। इस क्रम में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत स्टाइल में द्रुत लय सुनाई। प्रस्तुति के दौरान किए गए सवाल-जवाबों ने श्रोताओं-दर्शकों की खूब वाह वाही पाई। वाद्यों के बीच हुई इस खूबसूरत चर्चा को श्रोताओं ने खूब सराहा। उन्होंने प्रस्तुति का समापन धुन मिश्र किरवानी में धुन की प्रस्तुति दी।
श्रुति अधिकारी ने वाद्यों से परिचत कराते हुए बताया कि इसमें तीन सुर वाद्य हैं, संतूर, सितार और वायलिन। दो ताल वाद्य हैं मृदंगम और तबला। यह ग्रुप 10 साल पहले तैयार किया गया था। संतूर, तबला, सितार और वॉयलिन तो शामिल किए ही जाते हैं अंत में बांसुरी या पखावज जोड़ा जाता है। लेकिन पहली बार कर्नाटक स्टाइल संगीत के साथ वॉयलिन और मृदंगम शामिल किया गया।
यह अपनी तरह का पहला ऐसा ग्रुप है, जिसमें ग्यारह महिलाएं जुड़ चुकी हैं लेकिन संतूर श्रुति अधिकारी ही प्ले करती हैं। दिल्ली, बनारस, लखनऊ समारोह, कालीदास समारोह आदि में प्रस्तुति हो चुकी है। पंचनाद में आकॉस्टिक इंट्रूमेंट ही शामिल किए गए हैं, इसमें कभी कोई वेस्टर्न इंस्ट्रूमेंट शामिल नहीं किया है।
Published on:
10 Mar 2019 01:22 pm
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