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नदी, पहाड़, जंगल और झरनों से दिखाई प्रकृति की खूबसूरती

भारत भवन में चित्रकार आनंद डबली के चित्रों की एकल प्रदर्शनी

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भोपाल। भारत भवन में रूपाभ शृंखला में चित्रकार आनंद डबली के चित्रों की एकल प्रदर्शनी चल रही है। प्रदर्शनी में उनके 20 चित्रों का शामिल किया गया है। इसमें आनंद ने नदी, पहाड़, झरना जैसे लैंडस्केप में क्रिएटिविटी ऑफ नेचर को दिखाया है। करीब 12 साल से प्रकृति को अपने चित्रों में समेट रहे आनंद का कहना है कि मुझे प्रकृति के साथ रहकर काफी सुकून महसूस होता है और इसी सुकून को मैं चित्रों के रूप में प्रदर्शित करने की कोशिश करता हूं।

मैंने एक्रेलिक ऑन कैनवास पर इन्हें तैयार किया है।आनंद का कहना है कि चित्र मेरी भावनाओं के साथ समाज की परिस्थितियां और पर्यावरण को भी प्रदर्शित करता है। कुछ चित्रकार समाज के वास्तविक रूप को उकेरते हैं तो कुछ परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाते हुए रंगों का मनमोहक संयोजन करते हैं। कुछ ऐसे भी हैं कैनवास पर प्रकृति के विभिन्न रूपों का समावेश कर उन चित्रों को मनमोहक रूप प्रदान करते हैं। मैंने भी प्रकृति को जिस तरह से देखा है, उसकी खूबसूरती को कैनवास पर उकेरा है।

पानी पर पानी से लिखने जैसा काम है एक लघुकथा लिखना: भारद्वाज

भोपाल। लघुकथा वर्तमान समय में नि:संदेह साहित्य की लोकप्रिय विधा है, लघुकथा लिखना सहज नहीं, यह पानी पर पानी से लिखने जैसा काम है। साहित्य में समीक्षा और आलोचना का बड़ा महत्व है, सटीक आलोचना से रचना का सही मूल्यांकन होता है। यह बात वरिष्ठ साहित्यकार और लघुकथाकार गोविंद भारद्वाज ने लघुकथा शोध केंद्र की ओर से आयोजित लघुकथा पाठ व समीक्षा के आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में कही।इस अवसर पर उज्जैन के वरिष्ठ लघुकथाकार संतोष सुपेकर ने कहा कि विशिष्ठ जीवनानुभूतियों की अभिव्यक्ति है लघुकथा, लघुकथा लघु कलेवर में विराट का स्पर्श कराती हैं। लघुकथा लेखन में समकालीन परिदृश्य को समेटते हुए लघुकथाकार सशक्त लघुकथाओ का सृजन करें। इस मौके पर लघुकथाओं में नवीन विषय लाए जाएं, पुराने विषयों से बचें तथा उन्होंने कहा कि किसी रचना पर लेखक पाठक और समीक्षक के विचार अलग-अलग होते हैं।

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