
प्रदेश के रचनाकारों ने भाई-बहन के रिश्ते पर सुनाई ऐसी कविताएं कि लोगों हुए मंत्रमुग्ध
भोपाल . तुलसी साहित्य अकादमी की अेार से रक्षाबंधन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया । जिसमें स्थानीय और विभिन्न प्रांतों के रचनाकारों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। अध्यक्षता डॉ. मोहन तिवारी 'आनंदÓ ने की। मुख्य अतिथि डॉ. आरपी तिवारी 'राजेंद्रÓ ,विशिष्ट अतिथि डॉ. वासुदेवन शेष एवं डॉ. संगम लाल त्रिपाठी थे। अध्यक्ष डॉ. मोहन तिवारी आनंद ने अपने राखी के गीत से समां बांध दिया। गीत के बोल देखें- मोरी सूनी सेज तड़प रही, मेघा मत हैरान करो...रहे। भाई बहन के रिश्ते जग में अजर अमर कहलाते, बहनों की रक्षा में भाई अपनी जान लुटाते। मुख्य अतिथि डॉ. आरपी तिवारी 'राजेंद्रÓ का गीत -'धन्य है भाई बहन का प्यार, प्रीत के बंधन की मनुहार.. रहा। डॉ. वासुदेवन 'शेषÓ ने सुनाया कि मेरे संग बचपन में, जो चिडिय़ा चहका करती थी स जिसकी मोहक मुस्कान से, घर आंगन की मिट्टी महका करती थी।
भाई-बहन की बचपन की नौक-झौंक
वहीं गोकुल सोनी ने भाई-बहन की बचपन की नौक-झौंक पर दोहे प्रस्तुत किए। जिसमें उन्होंने बचपन में जिससे लड़ी, खूब उमेठे कान... की प्रस्तुति दी। डॉ. अशोक तिवारी 'अमनÓ ने सुनाया - प्रेम के धागों का यह बंधन, राखी का त्यौहार स सबसे प्यारा सबसे न्यारा, भाई बहन का प्यार...।
सब रिश्तों से बढ़कर रिश्ता है भाई बहन का
सीताराम साहू निर्मल ने सब रिश्तों से बढ़कर रिश्ता, ईश्वर एक बनाया, प्रेम, नेह, सर्वस्व समर्पित, भाई बहन का नाता... सुनाया। दुर्गारानी श्रीवास्तव ने अबके राखी पर भैया, मैं ना आ पाऊंगी, लेकिन मन से दूर तुम्हारे, रह ना पाऊंगी...सुनाया। सत्यनारायण तिवारी 'सत्यÓ ने सलोनों साहुन को त्यौहार, बरस में आबे एकई बार... सुनाया तो पूरन चंद गुप्ता ने छिपा हुआ है इस राखी में, भाई बहन का प्यार, सावन का पावन महिना ये, देता उन्हें दुलार...सुनाया।
Published on:
25 Jul 2021 09:32 pm
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