किसानों ने फसल बीमा के लिए जितनी प्रीमियम राशि जमा की, उससे कम बीमा मिल रहा है। यानी किसानों द्वारा जमा की गई राशि तक बीमा राशि के रूप में किसानों को नहीं मिल पा रही है। किसानों की इस दुर्दशा के लिए कोई उनकी आवाज नहीं उठा रहा है। दरअसल, किसान प्रत्यक्ष रूप से बीमा का प्रीमियम जमा नहीं करता है। जैसे ही किसान अपना केसीसी लोन लेता है, बैंक उस राशि से बीमा की प्रीमियम काटकर किसान को देती है। फिलहाल किसानों को पिछले साल की बीमा राशि मिल रही है। छिंदवाड़ा जिले के लिए शासन ने दीपावली के पहले सोयाबीन रोग क्षति और सूखे के नाम पर 67.59 करोड़ रुपए का मुआवजा पैकेज जारी किया, लेकिन एक माह बाद भी यह राशि तामिया के दूरवर्ती गांवों में नहीं पहुंच पाई। तामिया तहसील मुख्यालय से 60 किमी दूर ग्राम परतला, खापाढाना, बिसरागुढ़ी, रजौला, दैहर, कोसमी, चारगांव, मानेगांव, खमंतरा, बोदलकछार, हरकपुरा समेत आसपास के गांवों के हालात का जायजा यहां पहुंचकर लिया जा सकता है। बारिश न होने से ये गांव सूखे की चपेट में है।