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नेशनल ​हेराल्ड का MP लिंक: नियम विरुद्ध छ​ह टुकड़ाें में बेच दी जमीन

- नेशनल हेराल्ड का एमपी लिंक: प्रेस के अलावा कोई अन्य काम नहीं होगा, नियम नहीं मानने पर रद्द हो गई थी लीज - नियम में नहीं था, फिर भी छह टुकड़ों में बेच दी जमीन - सूबे में कई को झुलसाएगी नेशनल हेराल्ड जांच की आंच - मंत्री भूपेंद्र सिंह के जांच के आदेशदेने से मचा बवाल

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भोपाल। नेशनल हेराल्ड जांच की आंच मध्यप्रदेश में कई को झुलसा सकती है। दरअसल, सूबे के भोपाल और इंदौर में रियायती जमीन को कई टुकड़े करके बेच दिया गया। जबकि, यह न बेची जा सकती थी और न उसके टुकड़े किए जा सकते थे। दिलचस्प यह है कि इस जमीन की लीज-डीड ही 10 साल पहले 2012 में नियमों के उल्लंघन के कारण निरस्त कर दी गई थी। मूल लीज-डीड में शर्त थी कि नियम विपरीत इस जमीन पर किए निर्माण-भवन शासन के कब्जे में आ जाएंगे। ऐसे में अब सरकार चाहे तो इस नियम के आधार पर इस जमीन पर संचालित व्यावसायिक भवनों को राजसात कर सकती है।

इसी कारण अब मंत्री भूपेंद्र सिंह के जांच के आदेश देने से बवाल मच गया है। मामले में भोपाल में किस प्रकार लीज-डीड नियमों के खिलाफ जमीन की खरीद-फरोख्त की गई इसका नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने खुलासा किया है।

इस तरह की गई खरीद-फरोख्त
1.बीडीए भोपाल द्वारा निर्मित प्रेस कॉम्प्लेक्स में 2.45 एकड़ जमीन को 1986 में राज्य सरकार ने आवंटित किया। नियम था कि जमीन का उपयोग यदि बदला गया तो शासन सेउसका भू-भाटक बदलवाना होगा।

2. 1993 में 27.22 एकड़ जमीन बीडीए को राजस्व विभाग ने प्रेस कॉम्प्लेक्स की दी। नियम रखा कि यदि जमीन का उपयोग बदला गया, तो शासनजमीन को वापस ले लेगा।

3. बीडीए ने प्रेस कॉम्प्लेक्स के भूखंड क्र. एक को एसोसिएट जनरल लिमिटेड नई दिल्ली को समाचार पत्र के लिए 1981 में आरक्षित किया। एक लाख रुपए प्रति एकड़ के आधार पर आवंटन किया गया। इसमें 1.14 एकड़ जमीन दी गई।0.14 एकड़ अतिरिक्त थी।

4.लीज डीड के तहत जमीन का उपयोग प्रेस बिल्डिंग, ऑफिस में ही हो सकता था, पर दूसरे व्यावसायिक काम पाए जाने पर लीज 2012 में निरस्त कर दी गई।

5. एसोसिएट जनरल लिमिटेड ने शर्तों का उल्लंघन कर जमीन का व्यावसायिक उपयोग किया। एसोसिएट के डायरेक्टर विश्वबंधु गुप्ता ने भूखंड के 6 टुकड़े कर अलग-अलग लोगों को बेचे। बिक्री 2007-08 में हुई।

6.2014 में जब जमीन खरीदने वालों ने बीडीए में नामांतरण के लिए आवेदन दिया, तो मामला सामने आया। बीडीए ने नामांतरण से इनकार कर दिया।

मामला दूर तक जाएगा
मंत्री भूपेंद्र सिंह ने खरीद-फरोख्त में जिम्मेदारों की जवाबदेही भी तय करने के आदेश दिए हैं। भोपाल की जमीन की जांच के लिए आइएएस अफसर की अध्यक्षता में टीम बनना है। वजह ये कि एक महीने के भीतर इसकी जांच पूरी की जानी है।

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