
22 एडिशनल एसपी के तबादलें
अशोक गौतम,
भोपाल। गरीबों को घर बनाने के लिए सरकार उन्हें सिर्फ एक से डेढ़ लाख रुपए देती है। जबकि आइएएस अधिकारी कार्यालय में अपने लिए कक्ष बनवाने में 20-20 लाख रुपए से अधिक की राशि खर्च कर देते हैं। कार्यायल में उनके लिए पहले से कक्ष होते हैं, लेकिन कई अफसरों को पहले से बने कक्ष रास नहीं आते हैं। ये अधिकारी या तो उसे तोड़वाकर नए सिरे से बनवाते हैं या फिर उसे अपने से अधीनस्थों को वो कक्ष देकर अपने लिए अलग से नया कक्ष बनवाते हैं। इसके साथ उनके लिए कुर्सी-टेबल, टीवी सहित अन्य सामान भी नए सिरे से खरीदा जाता है।
आइएएस अधिकारियों को यह आजादी विभागों में नहीं होती है, इससे वे सरकार के निगम, मंडलों और कंपनियों के जरिए अपने कक्ष बनाने में लाखों रुपए फूंकते हैं। क्योंकि इन संस्थाओं में अफसरों का ही पूरा अधिकार होता है। इसके अलावा वित्त विभाग के अडंगों का उन्हें जवाब भी नहीं देना होता है। वे संचालक मंडल में रेनोवेशन, भवन की मरम्मत, पार्टीशन और अतिरिक्त कक्ष के निर्माण के नाम पर संचालक मंडल में प्रस्ताव पास कर काम कराना शुरू कर देते हैं। निगम मंडलों में उन्हें गाड़ी, अतिरिक्त कक्ष के निर्माण सहित अन्य कार्यों में खर्च, आउट सोर्स से कर्मचारियों को रखने में भी कोई झिझक नहीं होती है।
केस एक- मप्र राज्य योजना आयोग में आइएएस अधिकारी अभिषेक सिंह की मुख्य सलाहकार के रुप में पदस्थगी हुई। उन्होंने अपने लिए अलग से कक्ष का निर्माण कराया। उनके पास योजना आयोग के साथ साथ आर्थिक एवं सांख्यकीय विभाग के कमिश्नर का भी चार्ज है। योजना आयोग के नीचे ही इसका कार्यालय है। उनके लिए यहां भी एक कक्ष आवंटित है। इसके अलावा सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में इनके लिए एक अतिरिक्त कक्ष की भी व्यवस्था है।
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केस दो- ऊर्जा विकास निगम में प्रमुख सचिव संजय दुबे के लिए एक अतिरिक्त कक्ष बनाया गया। करीब 1000 से लेकर 12 सौ स्वायरफिट में उनके लिए कक्ष बनाया गया। कक्ष के निर्माण की राशि रीवा अल्ट्रा सोलर मेगा प्रोजेक्ट कंपनी के जरिए बनाया गया है। जबकि प्रमुख सचिव और आयुक्त के लिए पहले से एक कक्ष बनाया गया था, लेकिन उन्हें यह कक्ष रास नहीं आया। बताया जाता है कि इनके लिए कक्ष निर्माण में 30 लाख रुपए से अधिक राशि खर्च की गई है। इन्होंने अपने कक्ष के चक्कर में उर्जा विकास निगम की डिजाइन ही बदल दी।
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केस तीन - खनिज निगम में आइएएस अधिकारी और ईडी वरदमूर्ति मिश्रा और चेयरमेन के लिए बनाया जा रहा है। जबकि निगम में पहले भी चेयरमेन के लिए कक्ष बनाया गया था, जो वर्तमान में है भी। ईडी के लिए भी कक्ष है, लेकिन उन्हें यह कक्ष रास नहीं आ रहा है। अब ईडी और अध्यक्ष के लिए नए सिरे से कक्ष बनाया जा रहा है। इन दोनों चेम्बर के निर्माण में 20 लाख रुपए से अधिक राशि खर्च की जा रही है।
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केस चार - उद्यानिकी विभाग में आइएएस अधिकारी आयुक्त ई-रमेश के लिए कक्ष बनाया जा रहा है। जबकि इस कार्यालय में आयुक्त के लिए पहले से कक्ष है। इनके लिए कार्यालय के रेनोवेशन के नाम पर नया कक्ष बनाया जा रहा है।
Published on:
10 Feb 2022 11:09 pm
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