
एम्स में 15 घंटे की सर्जरी कर गले से लेकर पीठ तक फैले 40 सेंटीमीटर लंबे ट्यूमर को निकाला गया है। प्रबंधन का दावा है कि न्यूरोसर्जरी विभाग की टीम द्वारा दुनिया का सबसे लंबा ट्यूमर निकाला गया है। इस सर्जरी की सबसे चुनौती पूर्ण बात यह है कि इसके लिए स्पाइनल कॉर्ड को बीच से काट कर अलग किया गया था। जिससे ट्यूमर को पूरी तरह निकाला जा सके। इसके बाद स्क्रू व मिनी प्लेट के जरिए जोड़ा भी दिया गया।
जानकारी के अनुसार इंट्रामेडुलरी स्पाइनल ट्यूमर से पीड़ित राजगढ़ निवासी 22 वर्षीय महिला गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंची थी। उसके हाथ पैरों ने काम करना बंद कर दिया था। मरीज की एमआरआई जांच से बीमारी की पुष्टि हो सकी थी। महिला की रीढ़ की हड्डी अंग्रेजी के सी आकार में मुड़ी हुई थी। जिसके चलते इलाज और भी जोखिम पूर्ण हो गया था। इसी स्थिति को देखते हुए न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रोफेसर अमित अग्रवाल और विभाग के सभी संकायों के साथ एक कमेटी बनाई थी।
मुड़ी हुई थी रीढ़ की हड्डी
जानकारी के मुताबिक यह आॅपरेशन सामान्य सर्जरी के मुकाबले ज्यादा जटिल थी, क्योंकि महिला की रीढ़ की हड्डी अंग्रेजी के सी आकार में मुड़ी हुई थी। इसे स्कोलियोसिस कहा जाता है। ऐसे में रीढ् की हड्डी को खोलकर स्पाइनल कॉर्ड से ट्यूमर निकालना जोखिम पूर्ण था। महिला की स्थिति को देखते हुए न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रोफेसर अमित अग्रवाल और विभाग के सभी संकायों के साथ अंतर्विभागीय कमेटी बनाई गई।
इंट्रामेडुलरी ट्यूमर क्या है?
आमतौर पर स्पाइनल ट्यूमर तीन प्रकार के होते हैं: एक्स्ट्राड्यूरल, इंट्राड्यूरल एक्स्ट्रामेडुलरी और इंट्रामेडुलरी। इनमें से इंट्रामेडुलरी ट्यूमर सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण होते हैं। ये ट्यूमर रीढ़ की हड्डी के अंदर होते हैं और इसलिए इन ट्यूमर तक पहुंचने के लिए रीढ़ की हड्डी को खोलना पड़ता है। इंट्रामेडुलरी ट्यूमर का प्रबंधन चुनौतीपूर्ण है। सफलता न्यूरोसर्जन, न्यूरो-एनेस्थेसियोलॉजिस्ट, न्यूरोफिजियोलॉजिस्ट और एक सहयोगी मरीज के बीच समन्वय पर निर्भर करती है।
Published on:
20 Feb 2024 09:23 pm

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