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शहर का सबसे पुराना चर्च, 199 साल पहले कराया गया था निर्माण, सीहोर से आते थे अंग्रेज

- अब भी बना हुआ है पुराना स्वरूप, क्रिसमस के लिए चल रही हैं तैयारी- पुरातत्व विभाग ने किया है संर क्षित, शासन से मिलता है वार्षिक अनुदान

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भोपाल

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Shakeel Khan

Dec 23, 2023

शहर का सबसे पुराना चर्च, 199 साल पहले कराया गया था निर्माण, सीहोर से आते थे अंग्रेज

शहर का सबसे पुराना चर्च, 199 साल पहले कराया गया था निर्माण, सीहोर से आते थे अंग्रेज

भोपाल. राजधानी में क्रिसमस को लेकर तैयारी चल रही हैं। ईसाई समुदाय में घरों से लेकर चर्च तक धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो गए है। इस बीच राजधानी के सबसे पुराने कैथोलिक सेंट फ्रांसिस चर्च में विशेष् आयोजन होंगे। यह शहर का सबसे पहला चर्च है जो करीब 199 साल पहले कराया गया था। खास बात ये है कि आज भी यह अपने पुराने स्वरूप में है। इसे पुरातत्व विभाग ने धरोहर के रूप में संर क्षित किया है।

पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय मध्य प्रदेश के अनुसार साल 1824 में चर्च का निर्माण हुआ था। चर्च को बनाने की अनुमति भोपाल रियासत की आठवीं शासक सिंकदरजहां बेगम ने दी थी। दी गई जानकारी के मुताबिक निर्माण साल्वाडोर बोरबन के उत्ताराधिकारी बाथाजार बोरबन उर्फ शहजाद मसीह के फादर बर्नार्ड पिस्टोइया की देखरेख में हुआ था।
वर्तमान में शासन की ओर से वार्षिक अनुदान भी दिया जाता है।

जमा होंगे एक हजार से ज्यादा लोग
- जहांगीराबाद इस चर्च के फादर हेरमोन कुजूर ने बताया कि करीब एक हजार लोग क्रिसमस पर यहां जमा होंगे। चर्च के अंदर और परिसर में उनके लिए इंतजाम किए जा रहे हैं। 24 दिसम्बर की रात को आयोजन के लिए काम चल रहा है। इन्होंने बताया कि यह अब भी अपने पुराने स्वरूप में है। पुरातत्व विभाग ने इसे संर क्षित किया है। यहां कोई भी काम कराने के लिए पहले अनुमति लेती होती है। यह शहर का मदर चर्च है। इसके बाद भी बाकी जगह निर्माण हुए हैं।

शहर में 16 कैथोलिक चर्च
जानकारी के अनुसार वर्तमान में शहर में 16 कैथोलिक चर्च हैं। जो शहर के अलग-अलग हिस्सों में हैं। इनमें संत हिरदाराम नगर, कोलार, ईदगाह हिल्स, भेल बरखेड़ा सहित सभी अन्य स्थानों पर बने हैं।


नवाबी दौर में सीहोर में थी अंग्रेजों की छावनी
भोपाल राज्य की ब्रिटिश सैन्य छावनी सीहोर में थी, जिसके कई अधिकारी यहां आकर बसते थे। उनकी पूजा आराधना के लिए नगर में पहला चर्च बनाया गया। साल 1963 में इसका नवीनीकरण कर इसे कैथेड्रल (महाचर्च) का दर्जा दिया गया।