
भोपाल। एनीमिया यानी खून की कमी की शिकायत हर दूसरी महिला को है। इसके बाद भी 40 फीसदी महिलाएं सरकार द्वारा फ्री में उपलब्ध आयरन फोलिक एसिड टेबलेट नहीं खाती हैं। पबमेड में छपी रिपोर्ट के अनुसार इस दवा से उल्टी, कमजोरी, जैसे साइड इफेक्ट के चलते महिलाएं सेवन नहीं करतीं हैं। जिससे समस्या बढ़ रही हैं।
एनएचएफएस 5 की रिपोर्ट बताती है कि गर्भवती की मौत के सर्वाधिक मामले असम के बाद मध्यप्रदेश में प्रति एक लाख प्रसव पर 173 है। वहीं सीवियर एनीमिया के मामले में अलीराजपुर के बाद भोपाल 3 फीसदी महिलाओं के साथ दूसरे नंबर पर है। वहीं लगभग 50 फीसदी महिलाओं को मॉडरेट एनीमिया है।
एनीमिया कोई रोग नहीं है लेकिन कई रोगों का बड़ा कारण बन सकता है। फास्ट फूड की जगह घर का खाना ज्यादा खाना चाहिए। साथ ही ताजे फलों का नियमित सेवन करना चाहिए। इससे खून की कमी दूर होगी।- डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव, मेडिसिन विशेषज्ञ, जेपी अस्पताल
● हीमोग्लोबिन लेवल 12 ग्राम से ज्यादा है तो एनीमिया नहीं माना जाता है।
● हीमोग्लोबिन लेवल 7 से 10 ग्राम है तो उसे मॉडरेट एनीमिया कहते हैं। जिसे खान-पान और आयरन की गोली से ठीक कर सकतें हैं।
●7 ग्राम से नीचे उसे सीवियर एनीमिया माना जाता है, जिसका तत्काल उपचार कराना आवश्यक है।
यह तलाशे जा रहे हैं विकल्प
●एनीमिया के इलाज में एलोपैथी और आयुर्वेद में ज्यादा कारगर कौन है, इसका कोई प्रमाणित तथ्य नहीं है। इसकी पुष्टि के लिए एम्स शोध कर रहा है।
●केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर आयरन के स्वदेशी टीके पर काम किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार टीका तैयार है। इसके शरीर पर प्रभाव व यह कितना सुरक्षित है इसपर विशेषज्ञ मंथन कर रहे हैं।
एनीमिया से समस्याएं
● एनीमिया पीड़ित गर्भवती के शिशु के कुपोषित होने की आशंका ज्यादा
● एनीमिया के कारण थकान और सांस फूलने की समस्या
Published on:
22 Apr 2024 11:31 am

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