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मध्यप्रदेश के आईएएस अधिकारी ने उर्दू सीखकर लिखीं ये नज्में

सीनियर आईएएस अशोक शाह के 'उफ्क के पार' कविता संग्रह का लोकार्पण

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मध्यप्रदेश के आईएएस अधिकारी ने उर्दू सीखकर लिखीं ये नज्में

भोपाल। खुश्बू एजूकेशनल कल्चरल सोसायटी के तत्वावधान में सीनियर आईएएस और कवि अशोक शाह के कविता संग्रह (उर्दू) उफ्क के पार का लोकार्पण परिचर्चा और रचना पाठ का आयोजन हुआ। मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा हिन्दी और उर्दू में प्रकाशित इस पुस्तक के लोकार्पण समारोह में कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री मंजूर एहतेशाम ने की। मुख्य अतिथि के रूप में साहित्यकार राजेश जोशी, देवी सरन, जिया फारूकी, इकबाल मसूद, श्याम मुंशी ने अशोक शाह के कृतित्व पर अपने अपने विचार रखे।

उर्दू अकादमी ने उनके संग्रह को हिन्दी और उर्दू में एक साथ प्रकाशित किया

सामाजिक न्याय विभाग के पीएस अशोक शाह को कविताएं लिखने का शौक है। कुछ समय पहले उन्होंने उर्दू सीखना शुरू किया। उर्दू सीखने के बाद जब उन्होंने अपने संग्रह का अनुवाद किया तो मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी ने उनके संग्रह को हिन्दी और उर्दू में एक साथ प्रकाशित किया। इस अवसर पर मंजूर एहतेशाम ने कहा कि अशोक शाह के पास तखलीक का ख़ुदादाद इनाम तो है ही इससे बड़ी चीज वह मोहब्बत है जो इंसान को इंसान के करीब लाने का काम करती है।

इस अवसर पर देवी सरन ने कहा कि शाह के तसव्वुर की उड़ान अंतरात्मा की आवाज है। जिसमें सामाजिक सरोकार का भरपूर समावेश साफ साफ दिखाई देता है। एक मैकेनिकल इंजीनियर ने किस तरह वक्त निकाल कर उर्दू सीखी और फिर हिन्दी शायरी के तजुर्बों का बरसरेकार लगा कर उर्दू में शेरगोई की तरफ माईल हुए यह अपने आप में एक मिसाल है।

इस अवसर पर उर्दू के वरिष्ठ साहित्यकार इकबाल मसूद ने कहा अशोक शाह की शायरी पढ़ते हुए बार-बार एहसास होता है जैसे कोई पेंटिंग देख रहे हैं वो शब्दों से पहले लकीरें बनाते हैं, फिर उन लकीरों में जिंदगी दौडऩे लगती है और यह हमारे वक्त के किसी न किसी मसाईल की शानदार नक्कासी करती है। इस अवर पर अशोक शाह ने अपनी चयनित कविताओं का रचना पाठ किया।