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सिर्फ पढ़ने- लिखने और घूमने के लिए इस आईएएस ऑफिसर ने छोड़ दी नौकरी

- एक राजनीति ही ऐसा क्षेत्र है जिसमें मेरी कोई दिलचस्पी नहीं, चुनाव लड़ने का तो सवाल ही नहीं- बी चंद्रशेखर - वीआरएस लेने वाले आईएएस अधिकारी से पत्रिका की खासबात - बी चंद्रशेखर की एक नॉवेल जल्द देने वाली है बाजार में दस्तक

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भोपाल@रूपेश मिश्रा

मध्यप्रदेश कैडर के 2002 बैच के आईएएस अधिकारी बी चंद्रशेखर ने वीआरएस मांग लिया है। चंद्रशेखर जबलपुर कमिश्नर के पद पर पदस्थ थे। इनके वीआरएस मांगने के बाद से सोशल मीडिया से लेकर ब्यूरोक्रेसी तक में इनको लेकर तरह- तरह की चर्चाएं हैं। कोई कह रहा है कि चंद्रशेखर अब सियासी अखाड़े में भाग्य आजमाएंगे तो कोई कह रहा है कि सरकार के टसल के कारण इन्होंने वीआरएस मांगा है। इन्ही सब सवालों के बीच पत्रिका ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बी चंद्रशेखर से खासबात की और जानना चाहा कि आखिर उन्होंने आईएएस की नौकरी छोड़ने का निर्णय क्यों लिया। पढ़िए बी चंद्रशेखर से पत्रिका की बातचीत के प्रमुख अंश

सवालः कैसे आपने एकाएक वीआरएस लेने का प्लान बना लिया?
जवाबः देखिए मेरा साहित्य से हमेशा जुड़ाव रहा है और पिछले कई सालों से मैं नॉवेल लिख रहा हूं। और नौकरी में रहते हुए इसके लिए समय नहीं मिल पाता है इसलिए मैंने वीआरएस मांगा है। अब मैं लेखन और घूमने- फिरने का काम करूंगा क्योंकि ये मुझे बचपन से ही पसंद रहा है।

सवालः क्या कोई राजनैतिक दबाव था कि आप खुलकर काम नहीं कर पा रहे थे।
जवाबः नहीं..नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है। मैंने सोशल मीडिया में भी लिखा है कि यदि आपको नौकरी करना है तो इससे अच्छी तौ कोई नौकरी ही नहीं है। जिसके माध्यम से आप जनता के लिए काम कर सकते हैं।

सवालः आपकी छवि ईमानदार अफसर की रही है। तो क्या भ्रष्टाचार देखकर मोहभंग हो गया।
जवाबः नहीं...मुझे तो लग रहा है कि अभी तक का 20 सालों का सफर मेरे लिए बेहतरीन रहा है। और कभी ऐसा लगा ही नहीं कि मैं दबाव में हूं या ऐसी कोई चीज नहीं कर पा रहा हूं जो करना चाहता हूं। मेरी हमेशा से यही कोशिश रही है कि जहां- जहां भी रहें लोगों के लिए कुछ अच्छा करें।

सवालः आपने बताया आपको लिखने का शौख है तो क्या आपकी कोई नई किताब दस्तक देने वाली है।
जवाबः जी..मैं एक नॉवेल लिख रहा हूं। जो लगभग पूरी हो चुकी है। उसके एडिटिंग की प्रक्रिया चल रही है। अगले कुछ महीनों में आप उसे पढ़ पाएंगे। ज्यादा कुछ तो अभी नॉवेल के बारे में बताना ठीक नहीं है। लेकिन उसकी थीम 'इंटर पर्सनल रिलेशनशिप' पर है।

सवालः चर्चा है कि जल्द आप राजनीति में पदार्पण करने वाले हैं।

जवाबः यदि आप मेरे बारे में फीडबैक लेंगे तो आपको खुद पता चलेगा कि मेरी राजनीति में कोई दिलचस्पी ही नहीं है। सिर्फ यही एक क्षेत्र है जिसमें मैं बिल्कुल नहीं जाना चाहूंगा। और आपने जो सवाल पूछा कि टिकट मिले तो चुनाव लड़ेंगे तो मैं बिल्कुल स्पष्ट कर दूं मेरी बिल्कुल रूचि नहीं है।

सवालः कोई एक बड़ा सामाजिक मूवमेंट भी खड़ा करने योजना है...ऐसी चर्चा है।
जवाबः पता नहीं अब ये सब बातें कहा से निकलकर सामने आ रही है। ये सिर्फ लोगों का अनुमान है। इसमें बिल्कुल सच्चाई नहीं है। मैंने सिर्फ लिखने, पढ़ने और घूमने के लिए ये निर्णय लिया है। और जहां तक बात समाजसेवा की है तो जिस प्रोफेशन में मैं था वहां रहकर समाजसेवा करना तो सबसे बेहतर है।

सवालः जब सबकुछ इतना बेहतर था, आप नौकरी से खुश थे तो फिर क्यों दिया।
जवाबः कभी- कभी हर व्यक्ति के जीवन में एक ऐसा समय आता है जब अंदर की आवाज सुननी पड़ती है कि आप करना क्या चाहते हो। और वो आवाज हर कोई नहीं सुन पाता है। मैं पिछले तीन सालों से नॉवेल लिख रहा हूं। समय नहीं मिलता था बड़ा समझौता करना पड़ता है। तब मुझे लगा कि जो अंदर से आवाज आ रही है उसे सुनना चाहिए और उस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए तब मैंने ये निर्णय लिया।