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ये हैं हमारी महिला शक्ति, विज्ञान के क्षेत्र में झाड़ा झंडा

प्रदेश की महिलाएं तकनीक, विज्ञान, अभियांत्रिकी और गणित के क्षेत्र में किसी से कम नहीं हैं। उनकी उपलब्धियां काबिले तारीफ हैं। महिलाओं की विज्ञान में सहभागिता के अंतरराष्ट्रीय दिवस पर आठ महिलाओं को उनकी विशिष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। किसी ने अपने रिसर्च से किसानों की मदद की है तो कोई सीमा पर डटे देश के जवानों की सुरक्षा के लिए काम कर रही हैं।

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सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में स्टेम यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स के क्षेत्र में निपुण महिलाओं को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सम्मानित किया। इस मौके पर इंदर सिंह परमार, मंत्री उच्च शिक्षा तकनीकि शिक्षा कौशल विकास एवं रोजगार और गौतम टेटवाल, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तकनीकी शिक्षा कौशल विकास एवं रोजगार भी उपस्थित थे।

स्टेम में निपुण महिलाएं
बबीता रहेजा, फाउंडर रहेजा सोलर, इंदौर
बबीता रहेजा किसानों को फूड प्रोसेसिंग में मदद कर उनकी जिंदगी संवार रही हैं। इनके सोलर ड्रायर से किसानों की आमदनी डबल हुई है। 7 साल पहले शुरू हुए इनके स्टार्टअप से अब तक देशभर के 50 हजार से ज्यादा किसानों को मदद मिल चुकी है। इनमें कुछ अफ्रीकन किसान भी शामिल हैं। पांच सालों में 20 लाख किसानों की मदद का इरादा है।

डॉ. नीति जैन, साइंटिस्ट, टीआरटी ग्वालियर
डॉ. नीति जैन दुर्गम स्थलों पर तैनात सैनिकों के लिए विशिष्ट दवाइयों की खोज कर रही हैं। करीब 20 सालों से इस क्षेत्र में काम कर रही नीति ने सीमा पर तैनात सैनिकों के लिए वहां विपरीत जलवायु के लिए विशिष्ट प्रकार की फार्मोकोलॉजी पर काम किया है।

मोना सिंह, प्रभाकरम वस्त्रम, भोपाल
मोना सिंह स्किल इंडिया स्किल डेवलपमेंट के तहत अब तक 7 से 8 लाख महिलाओं की मदद कर चुकी हैं। अपनी विशिष्ट तकनीक के जरिए यह महिलाओं और युवाओं को उनकी रुचि के हिसाब से स्वरोजगार से जोड़ रही हैं। यह 2013 से स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम से जुड़ी हैं।

तृप्ता ठाकुर, डायरेक्टर जनरल, नेशनल पॉवर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, मिनिस्ट्री ऑफ पॉवर, गवर्नमेंट ऑफ इंडिया
तृप्ता ठाकुर पिछले 30 सालों से इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कार्यरत हैं। यह विद्युत वितरण में नई टेक्नोलॉजी स्मार्ट मीटर आदि पर काम कर रही हैं। ठाकुर साइबर सिक्योरिटी की भी एक्सपर्ट हैं। इसके लिए इन्हें विदेश में कई अवार्ड मिल चुके हैं।

डॉ. अर्चना सिंह, प्रिंसिपल साइंटिस्ट, सीएसआईआर भोपाल
डॉ. अर्चना सिंह को मटेरियल डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम करने के लिए सम्मानित किया गया। इन्होंने वाटर ट्रीटमेंट, हाइड्रोजन जनरेशन, वेसटू वेल्थ के क्षेत्र के क्षेत्र में रिसर्च किया है। यह एम्प्री में बीते 10 वर्षों से कार्यरत हैं।

डॉ. प्रियंका पालीवाल, एसोसिएट प्रोफेसर मैनिट भोपाल
डॉ. प्रियंका एमएएनआईटी में 18 वर्षों से इंजीनियररिंग और टेक्नालाजी के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। इनके 80 से ज्यादा रिसर्च पेपर इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग में प्रकाशित हो चुके हैं। अभी यह मध्य प्रदेश सरकार और कं्रेद सरकार के सोलर एनर्जी से जुड़े कई प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं।

प्रोफेसर महालक्ष्मी, आईआईएसईआर भोपाल
विज्ञान के क्षेत्र में काम करने के लिए इन्हें अवार्ड दिया गया। आईआईएसईआर में बीते 14 वर्षों से यह विज्ञान की प्रोफेसर हैं। कोशिका के अंदर माइटोकोंड्रिया के प्रोटीनों का अध्ययन करने के लिए इन्हें सम्मानित किया गया।

किरन बाला, प्रोफेसर, आइआइटी इंदौर
आइआइटी इंदौर में बायोसाइंसेस एंड बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग में बीते 6 वर्षों से कार्यरत किरना बाला ने सैवाल (काई) से डीजल और प्लास्टिक बनाने की प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं। इससे जुड़े इनके कई पेपर देश-विदेश में प्रजेंट हो चुके हैं।