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बाघिन टी-123 बनी मां, 3 शावकों को दिया जन्म, कैमरा ट्रैप में कैद हुई तस्वीर

बाघों के लिए पसंदीदा स्थल बन चुका समर्धा रेंज का केरवा व कलियासोत इलाका

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tiger

Tiger born T-123

भोपाल। बाघों के लिए पसंदीदा स्थल बन चुका समर्धा रेंज का केरवा व कलियासोत इलाका बाघों से गुलजार हो रहा है। पिछले करीब डेढ़ साल से केरवा में स्थायी रूप से रही बाघिन टी-123 ने तीन शावकों को जन्म दिया है। शावक करीब तीन माह के हो चुके हैं। वन विभाग के कैमरा ट्रैप में शावकों सहित बाघिन की तस्वीर कैद हुई है। अभी तक वन विभाग केरवा में तीन शावकों के साथ दिखी बाघिन को कठौतिया में रह रही बाघिन टी-21 मान रहा था, लेकिन उसी बाघिन के लगातार दिखने पर विभाग ने करीब आधा सैकड़ा फोटोग्राफ से मिलान किया तो पता चला कि यह बाघिन टी-123 ही है। और शावक भी इसी के हैं। केरवा फील्ड में तैनात डिप्टी रेंजर दिनेश जोशी ने इसकी पुष्टि की है।

भ्रमित हो रहे थे अधिकारी
वन विभाग की केरवा चौकी के पीछे से लगे जंगल और आसपास पिछले एक माह में बाघिन की गतिविधि को देखकर वन विभाग का अमला भ्रमित हो रहा था। यहां बाघों की निगरानी के लिए ई-सर्विलांस जैसी सुविधा नहीं है, एेसे में पग माक्र्स और कैमरा ट्रैप से ही इन पर नजर रखी जा सकती है। एेसे में विभाग बाघिन टी-21 और टी-123 को लेकर भ्रमित हो गया था।

चार बाघ और बाघिन यहां बना चुके हैं ठिकान
केरवा और कलियासोत में अब तक चार बाघ-बाघिन ठिकाना बना चुके हैं। वर्ष 2015 में सबसे पहले बाघ टी-1 करीब 8 माह तक यहां रुका था। कुछ समय तक बाघिन टी-2 फिर बाघ टी-121 यहां पर आया और दो माह तक यहां रुका। वर्ष 2016 के अंत में बाघिन टी-123 यहां आई और तब से बनी हुई है। बाघ टी-1, बाघिन टी-21, बाघ टी-121 का आना जाना लगा रहता है। वनविभाग के कर्मियों का कहना है कि मौसम की अनुकूलता को देखते बाघ ने बाघिन को जन्म दिया अब उनकी देखरेख की जा रही है।