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एनजीटी का स्टे ऑर्डर हवा में, बेच रहे टाइगर कॉरिडोर की जमीन

कलियासोत इलाके में टाइगर कॉरिडोर में स्थित है यह जमीन, पेड़ों को काटकर साफ किया जा रहा जंगल, नष्ट किए बोर्ड...

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एनजीटी का स्टे ऑर्डर हवा में, बेच रहे टाइगर कॉरिडोर की जमीन

भोपाल. एनजीटी के स्टे के बावजूद कलियासोत-केरवा क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया जा रहा है। इतना ही नहीं इस जमीन पर लगातार टाइगर मूवमेंट बना हुआ है। नदी की ग्रीन बेल्ट तक जमीन का सौदा किया जा रहा है। जमीन कारोबारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे एनजीटी के स्टे को भी नकार रहे हैं, जबकि एनजीटी ने चंदनपुरा, मेंडोरा, मेंडोरी की जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने के लिए 30 मई 2017 से ही स्टे दे रखा है।

कलियासोत-केरवा क्षेत्र की वनभूमि व टाइगर मूवमेंट एरिया से संबंधित राशिद नूर खान की याचिका संख्या 159/2014 (सीजेड), याचिका संख्या 802 व 803/2015 समेत अन्य याचिकाओं की सुनवाई करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 30 मई 2017 को इस क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का स्टे ऑर्डर दिया था। इसके बाद भी इस क्षेत्र में निर्माण और अवैध खनन की गतिविधियां जारी हैं।

हाल ही में मिनिस्ट्री ऑफ इन्वायरमेंट एंड फॉरेस्ट द्वारा एनजीटी में सबमिट की गई रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि वर्ष 2003 के बाद 15 वर्षों में टाइगर मूवमेंट फॉरेस्ट में अतिक्रमण कर तमाम अन्य गतिविधियां की जा रही हैं। मामला कोर्ट में होने के बावजूद जमीन की खरीद-फरोख्त, निर्माण आदि गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया जा सका है।

जहां आइएएस-आइपीएस घुस जाते, वहां कोई नियम नहीं रहता

टाइगर मूवमेंट एरिया और टाइगर कॉरिडोर में स्थित जमीन पर तीन मोबाइल नम्बर लिखे हुए हैं, जिनमें 9827264660 गणेश सिंह बघेल, 9826309617 प्रवीन भंडारी और 9826583462 विनोद शर्मा का है।

पहले विनोद शर्मा से बात हुई और संवाददाता ने छोटा प्लॉट लेने की बात की तो उसने बताया कि वह तो पूरी 3.5 एकड़ जमीन बेचना चाहता है, जो 900 रुपए प्रति वर्गफीट की दर से लगभग 15 करोड़ रुपए की होती है। उसने यह भी बताया कि उसके पास कम्पलीट पेपर्स हैं, एनजीटी का कोई मामला नहीं है। यहां टाइगर कॉरिडोर और टाइगर मूवमेंट की बात स्वीकार करते हुए उसने बताया कि यहां कोई टाइगर प्रोजेक्ट नहीं है और अन्य जमीनें भी तो हैं।

विनोद शर्मा से बात करने के बाद 7000623744 से गणेश बघेल ने रिटर्न कॉल किया और जमीन के बारे में बात की। गणेश ने कम से कम पांच हजार वर्गफीट जमीन देने की बात की। उसने सड़क किनारे एक हजार रुपए वर्गफीट और अंदर की तरफ आठ सौ रुपए वर्गफीट के रेट बताए। उससे कलियासोत नदी से लगी टाइगर कॉरिडोर वाली जमीन पर एनजीटी की रोक और नदी के डूब क्षेत्र में होने की बात कही तो उसने कहा कि जमीन ग्रीन बेल्ट में है।

उसने यह भी बताया कि उसकी जमीन से लगी 20 एकड़ जमीन आइपीएस अफसरों ने ली है, जो वहां बंगले बनाएंगे और आइपीएस उसकी जमीन भी बार-बार मांग रहे हैं। उसने यह भी बताया कि चूनाभट्टी की पूरी जमीन ग्रीन बेल्ट की है, लेकिन आज वहां बसावट है, ऐसे ही यहां भी हो जाएगा। उसने कहा कि जहां आइएएस-आइपीएस चले जाते हैं, वहां नियम खत्म हो जाते हैं।

बंद नहीं होता खनन और अवैध परिवहन

कलियासोत-केरवा वन क्षेत्र में अवैध खनन और परिवहन की लगातार शिकायतें आती रही हैं, लेकिन ये गतिविधियां रोकी नहीं जा सकी हैं। अतिक्रमणकारी और अवैध खनन कारोबारी जमकर मनमानी कर रहे हैं। शनिवार देर रात भी कलियासोत के चंदनपुरा इलाके में कुछ लोग जेसीबी व डंपरों लेकर अवैध खनन करने पहुंचे थे, लेकिन स्थानीय लोगों व जमीन मालिक के विरोध पर चले गए। इस मामले में खनिज विभाग ने प्रकरण दर्ज किया है।

उल्लेखनीय है कि कारोबारी इस क्षेत्र से अवैध खनन कराते रहे हैं। इसके खिलाफ आवाज भी लगातार उठाई जाती रही है। यहां टाइगर कॉरिडोर के साथ-साथ अन्य दुर्लभ व लुप्तप्राय वन्यजीवों का विचरण भी होता है। इसके चलते वन, वन्यजीवन और वनोपज की सुरक्षा नहीं हो पा रही है। कलियासोत के चंदनपुरा, दामखेड़ा और केरवा के मेंडोरा-मेंडोरी आदि वन क्षेत्रों से अवैध खनन के अलावा रात में भी खनिज का अवैध परिवहन किया जाता है, जबकि सूर्यास्त से सूर्योदय इस क्षेत्र में भारी वाहन प्रतिबंधित हैं।

अन्य स्थानों पर भी निर्माण
केरवा-कलियासोत क्षेत्र में तमाम स्थानों पर निर्माण कार्य धड़ल्ले से चल रहे हैं। कलियासोत डैम के पास से लेकर मदर बुल फार्म तक कई निर्माण कार्य चल रहे हैं। वाल्मी पहाड़ी से आगे काफी दूर तक पहाड़ी काटकर लोगों ने नर्सरी, फिशरी आदि की भी बना ली हैं, जो रसूखदारों और अफसरों की बताई जाती हैं। यहां बेरोक-टोक निर्माण कार्य चल रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर कुछ कर्मचारियों का कहना है कि बड़े लोगों की जमीनें होने के कारण किसी विभाग के अधिकारी हाथ डालने की हिम्मत नहीं करते।
नहीं बच रहे तालाब के कैचमेंट
तालाब के कैचमेंट एरिया भी अतिक्रमण से नहीं बच पा रहे हैं। बड़े तालाब में तो जमीनों की खरीद-फरोख्त अभी तक चल रही है। इसी तरह शाहपुरा तालाब को पूरते हुए काफी जमीन कब्जा ली गई है और काफी हिस्से पर पूर्व में निर्माण भी हो चुके हैं।

एनजीटी के आदेश का अनुपालन कराया जाएगा। गलत कार्य करने वालों के खिलाफ समुचित कार्रवाई की जाएगी।
- संतोष कुमार वर्मा, एडीएम
मैं अभी रायपुर में फॉरेस्ट के स्पोट्र्स आयोजन में भाग लेने आया हूं। वापस आते ही कलेक्टर से इस बारे में बात करूंगा।
- डॉ. सूर्यप्रकाश तिवारी, सीसीएफ
इस बारे में भवन अनुज्ञा शाखा से बात करूंगा। जहां अतिक्रमण हैं, वहां से हटाए जाएंगे।
- संतोष गुप्ता, प्रभारी-झील संरक्षण, ननि