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ऐसे करें अपने करवाचौथ की महेंदी का रंग और गहरा

अपने पतियों की लंबी उम्र के लिए महिलाओं द्वारा रखे जाने वाला करवाचौथ का व्रत इस बार 8 अक्टूबर यानि रविवार को है।

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karwa chauth mehndi

भोपाल। करवा चौथ( karwa chauth) के दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखेगी। ये दिन उनके सौलह श्रृंगार यानि सजने-संवरने का दिन भी है। वहीं इस दिन सुहागिनों द्वारा मेहंदी लगाना शगुन माना जाता है और यह सुहाग की एक निशानी भी है। इस दिन भले ही अधिकांश महिलाएं मेहंदी लगाती हैं लेकिन कई बार कुछ महिलाओं के हाथों में मेहंदी का रंग फीका सा ही रह जाता है ऐसे में हाथों लगी में मेहंदी तब तक अच्छी नहीं लगती जब तक वह गहरी न रची हो।

मेहंदी का रंग जितना गहरा होता है मेहंदी (dark mehndi on karwa chauth)भी उतनी ही आकर्षक लगती है। इसलिए अगर आप मेहंदी का रंग गहरा चाहते हैं तो कुछ सरल घरेलू उपाय अपना सकते हैं, जिनसे आपकी महेंदी का रंग डार्क आ जाएगा। इसके अलावा ऐसा करने से आपके हाथों में लगी मेहंदी लंबे समय तक टिकी(tips of dark mehndi) भी रहेगी।

1. पानी से न धोएं ...
जब आप अपने हाथों में मेहंदी लगाती हैं तो उसे पानी से न धोएं। ऐसा करने पर मेहंदी साफ होने के साथ अपना रंग भी छोड़ देगी। इसके अलावा आप अपनी मेहंदी को हमेशा हल्के हाथों से रगड़ कर उतारे या बटर नाइफ का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे आपकी मेहंदी का रंग गहरा दिखेगा।

2. विक्स लगाएं...
मेहंदी लगाएं तो इसे पूरी रात छोड़ दें और अगली सुबह इसे हल्के हाथों से रगड़ कर उतार लें। कुछ लोगों का कहना है कि इसके बाद रंग को गहरा करने के लिए इस पर विक्स लगाएं। विक्स की गर्माहट से मेहंदी का रंग गहरा होगा।

3. लौंग की भाप लें...
मेहंदी के रंग को गहरा करने के लिए आप लौंग की भाप भी लें सकती हैं। जब आपकी मेहंदी (mehndi on karwa chauth) सूख जाएं तो इसे हल्के हाथों से रगड़ कर उतार दें और फिर लौंग को तवे पर दस से पंद्रह मिनट रखकर उनकी भाप लें।

4. शक्कर और नींबू का घोल लगाएं...
जब मेहंदी सूख जाएं तो उस पर शक्कर और नींबू का घोल लगाएं। घोल चिपचिपा होता हैं और इससे मेहंदी जल्दी नहीं उतरती।

5. वैक्सिंग या स्क्रबिंग न करें...
अगर आपको वैक्सिंग या स्क्रबिंग करनी है तो मेहंदी लगवाने के पहले ही कर लें। मेहंदी लगवाने के बाद वैक्सिंग और स्क्रबिंग करने से उसका रंग जल्दी हल्का हो जाता है।

इस कहानी को पढ़े बिना अधूरा है करवा चौथ का व्रत(story of karva chauth):
पति की लंबी आयु के लिए हिंदू धर्म में महिलाएं करवाचौथ का व्रत रखती हैं। यह त्यौहार दिवाली से कुछ दिन पहले कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन बिना कुछ खाए पिए निर्जला व्रत रहती हैं। सुबह सूर्योदय होने के साथ ही पूजा-पाठ की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जो रात को चंद्र दर्शन के साथ समाप्त होती हैं। इसके अलावा इस व्रत के विधान में करवाचौथ की कहानी का भी खास योगदान होता है। मान्यता है कि महिलाएं जब 16 श्रंगार कर इस व्रत की कथा पढ़कर सुनाती हैं, तब ही जाकर ये व्रत पूरा माना जाता है...

ये है करवाचौथ व्रत की कहानी :
एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। एक बार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सेठानी के साथ उसकी सातों बहुओं और बेटी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा। रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन कर लेने को कहा, इस पर बहन ने कहा- भाई, अभी चांद नहीं निकला है।

चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही मैं भोजन करूंगी।

साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख बेहद दुख हुआ। साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है। अब तुम उन्हें अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी( karva chauth story) ने अपनी भाभियों से कहा- देखो, चांद निकल आया है, तुम लोग भी अर्घ्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं।

साहूकार की बेटी अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इस वजह से करवा चौथ का व्रत भंग हो गया और विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में लग गया।

साहूकार की बेटी को जब अपनी गलती का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा मांगी और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया। इस प्रकार उस लड़की की श्रद्धा-भक्ति को देखकर एकदंत भगवान गणेश जी उसपर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान दिया। उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।

कहते हैं इस प्रकार यदि कोई मनुष्य छल-कपट, अहंकार, लोभ, लालच को त्याग कर श्रद्धा और भक्तिभाव पूर्वक चतुर्थी का व्रत को पूर्ण करता है, तो वह जीवन में सभी प्रकार के दुखों और क्लेशों से मुक्त होता है और सुखमय जीवन व्यतीत करता है।