
भोपाल। इस साल करवाचौथ का पर्व 8 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र के लिये पूरे दिन का व्रत रखती हैं और शाम को चांद देखकर पति के हाथ से जल पीकर व्रत समाप्त करती हैं। वहीं इसी वर्ष लागू हुए GST का प्रभाव जहां एक और इन दिनों बाजारों में दिखने को मिल रहा है। वहीं जानकारों का मानना है कि इस बार भोपाल में कुछ जगह चांद देरी से दिखाई दे सकता है।
इस दिन भगवान शिव, पार्वती जी, गणेश जी, कार्तिकेय जी और चांद की पूजा की जाती हैं। यह त्योहार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं सुबह-सुबह उठकर पूजा पाठ कर निर्जला व्रत करती हैं। पूरे दिन व्रती रहने के साथ शाम के समय महिलाएं 16 श्रृंगार कर एक जगह इकट्ठी होती हैं और साथ बैठकर चांद को जल चढ़ाती हैं और इस व्रत की कथा को पढ़ती और सुनाती हैं।
चांद पर GST का प्रभाव(Karwa Chauth 2017 Moon ):
बाजार में जीएसटी के प्रभाव के चलते ग्राहकों में आई कमी के बाद ही इस बार भोपाल में चांद पर भी देरी से व कम देर तक ही निकलने का अनुमान लगाया जा रहा है। मौसम के जानकारों के अनुसार सेटेलाइट से प्राप्त चित्रों के अनुसार इस बार 8 अक्टूबर को दोपहर या शाम के दौरान आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान है। जिसके चलते एक ओर जहां महिलाओं को चांद देरी से दिखाई देने का अनुमान है वहीं यह भी माना जा रहा है कि बादलों की आवाजाही के कारण चंद कम देर के लिए आसमान में दिखाई देगा।
ऐसा रहेगा भोपाल का मौसम:
- 07 अक्टूबर 2017 : इस दिन यानि शनिवार को कुछ जगहों पर गड़गड़ाहट सुनाई देने के साथ ही आसमान में बिजली चमकती भी दिखाई दे सकती है।
- 08 अक्टूबर 2017 (यानि करवा चौथ) : इस दिन यानि रविवार को दोपहर या शाम को आसमान में आंशिक रूप से बादल दिखाई देंगे, जो कुछ देर के लिए चांद को भी छूपा(Karwa Chauth 2017 Effects on moon) सकते है।
- 09 अक्टूबर 2017 : इस दिन यानि सोमवार को आसमान में हल्के बादल दिखाई दे सकते हैं।
- 10 अक्टूबर 2017 : इस दिन यानि मंगलवार को आसमान मुख्य रूप से साफ रहेगा।
वहीं मौसम के जानकार एचपी श्रीवास्तव भी हंसते हुए कहते हैं कि इस बार मौसम को देखते हुए लगता है कि इस बार चांद पर भी जीएसटी का Effect होने वाला है(GST Effect on moon)। जिसके चलते यह भी इस दिन कम ही देर दिखाई देगा।
भोपाल में सजे बाजार :
भोपाल के बाजार में भी इस बार महंगाई का असर साफ नजर आ रहा है। करवाचौथ का व्रत आठ अक्टूबर को है। वहीं महंगाई के चलते बाजारों में ग्राहक नजर नहीं आ रहे हैं। हालांकि, दुकानदारों ने करवाचौथ व्रत को लेकर खूब तैयारी की है। लेकिन ग्राहकों की कमी उन्हें परेशान किए हुए है। कुछ बाजार के जानकारों का यह भी मानना है कि इस बार पिछली साल के अपेक्षा कुछ मंदी रहेगी। क्योंकि जीएसटी भी परेशानी का विषय बना हुआ है। इस साल बिक्री को लेकर भले ही दुकानदारों में खासी उम्मीद है, मगर उनके अनुसार उन्हें जीएसटी(GST effect) ने परेशान कर रहा है।
करवा चौथ व्रत की कहानी :
एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। एक बार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सेठानी के साथ उसकी सातों बहुओं और बेटी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा। रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन कर लेने को कहा। इस पर बहन ने कहा- भाई, अभी चांद नहीं निकला है। चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही मैं भोजन करूंगी।
साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख बेहद दुख हुआ।
साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है। अब तुम उन्हें अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा- देखो, चांद निकल आया है, तुम लोग भी अर्घ्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं।
साहूकार की बेटी अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इस पवजह से करवा चौथ का व्रत भंग हो गया और विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में लग गया।
साहूकार की बेटी को जब अपनी गलती का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा मांगी और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया। इस प्रकार उस लड़की की श्रद्धा-भक्ति को देखकर एकदंत भगवान गणेश जी उसपर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान दिया। उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।
करवा चौथ की व्रत विधि :
व्रत के दिन सुबह सुबह के अलावा शाम को भी महिलाएं स्नान करें। इसके पश्चात सुहागिनें यह संकल्प बोलकर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें- ‘मम सुख-सौभाग्य पुत्र-पौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।’ विवाहित स्त्री पूरे दिन निर्जला (बिना पानी के) रहें। दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा बनाएं, इसे वर कहते हैं। चित्रित करने की कला को करवा धरना कहा जाता है। आठ पूरियों की अठावरी बनाएं, हलवा बनाएं, पक्के पकवान बनाएं। पीली मिट्टी से गौरी बनाएं और उनकी गोद में गणेशजी बनाकर बिठाएं। गौरी को लकड़ी के आसन पर बिठाएं।
गौरी को बैठाने के बाद उस पर लाल रंग की चुनरी चढ़ाए इसके बाद माता का भी सोलह श्रृंगार करें। वायना (भेंट) देने के लिए मिट्टी का टोंटीदार करवा लें। करवा में गेहूं और ढक्कन में शक्कर का बूरा भर दें। उसके ऊपर दक्षिणा रखें। रोली से करवा पर स्वस्तिक बनाएं। गौरी-गणेश और चित्रित करवा की परंपरानुसार पूजा करें।
सुहागनें भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना करें और करवे में पानी भरकर पूजा करें। इस दिन सुहागिनें निर्जला व्रत रखती है और पूजन के बाद कथा पाठ सुनती या पढ़ती हैं। इसके बाद चंद्र दर्शन करने के बाद ही पानी पीकर व्रत खोलती हैं। महिलाएं खास ध्यान रखें कि चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा करें। पूजा के बाद मिट्टी के करवे में चावल, उड़द की दाल, सुहाग की सामग्री रखकर सास को दी जाती है।
यानि इस साल अंदेशा है कि जहां एक ओर जीएसटी (Karwa Chauth 2017 Moon Timing and GST Effects on Karwa Chauth)के कारण ग्राहकों की कमी रह सकती है,वहीं चांद भी भोपाल में इस बार देरी से व कम देर ही दर्शन देगा।
बदल गया मौसम का मिजाज :-
इधर मध्यप्रदेश में मौसम का मिजाज बदल गया है। जबलपुर, बैतूल, होशंगाबाद समेत कई जगह बारिश हो रही है। इस वजह से फिलहाल मानसून की विदाई टल गई है। पिछले हफ्ते मानसून राजस्थान से विदाई ले चुका था। मौसम केंद्र ने पिछले दिनों अनुमान जताया था कि 5 अक्टूबर तक मानसून भोपाल से विदा हो सकता है। प्रदेश के श्योपुर कलां, ग्वालियर तरफ से मानसून के विदा होने की शुरुआत भी हो चुकी थी।
- मौसम विभाग की वेबसाइट पर दर्शाए गए नक्शे में विदाई की यह लाइन प्रदेश में ग्वालियर तरफ जहां थी अभी भी वहीं अटकी हुई है।
- मानसून ने इस बार भोपाल में मानसून ने 26 जून को दस्तक दी थी। सीजन के चारों महीनों जून, जुलाई और अगस्त में कोटा पूरा नहीं हो सका।
- सीजन में कुल 78.10 सेमी ही पानी बरसा। यह सीजन के कोटे 109 सेमी से करीब 30 फीसदी कम रहा।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी से नमी आ रही है। प्रदेश के कई जिलों में कहीं- कहीं बारिश हो रही है। मानसून की विदाई टलने की एक वजह यह भी है।
भोपाल में गरज- चमक के साथ हल्की बूंदाबांदी के आसार :
- आठ दिन से तप रहे शहर में मौसम का मिजाज बदल गया है। आसमान पर हल्के बादल छा गए हैं।
- मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि शनिवार को शहर में कहीं- कहीं गरज- चमक के साथ हल्की बूंदाबांदी होने के आसार हैं।
- बादल छाने से दिन का तापमान कम तो हुआ लेकिन उमस बढ़ने से लोग बेहाल रहे।
- शुक्रवार को दिन का तापमान 34 डिग्री दर्ज किया गया। गुरुवार रात से ही शहर में बादल छा गए थे।
- दिन में कई बार बादलों की वजह से सूरज की सीधी किरणें जमीन पर नहीं पड़ीं।
- गुरुवार को दिन में पारा अधिकतम 33.8 डिग्री तक पहुंच सका था।
Updated on:
07 Oct 2017 07:35 pm
Published on:
06 Oct 2017 01:38 pm
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