
AIIMS Bhopal (फोटो सोर्स : @AIIMSBhopal)
MP News: राजधानी में अब मृत्यु के कारणों की जांच का तरीका बदलने जा रहा है। जल्द ही शहर में वर्चुअल पोस्टमार्टम (वर्चुअल ऑटोप्सी) की सुविधा शुरू की जाएगी। यह एक ऐसी आधुनिक फॉरेंसिक प्रक्रिया है, जिसमें शव को चीरे बिना अत्याधुनिक तकनीक के जरिए अंदरूनी चोटों, अंगों की स्थिति और मृत्यु के कारणों का डिजिटल विश्लेषण किया जाएगा। समय की भी बचत होगी और वर्चुअल पोस्टमॉर्टम आधे घंटे में हो सकेगा।
यह सुविधा न केवल मृतकों के परिजनों के लिए राहत लेकर आएगी, बल्कि डॉक्टरों, फॉरेंसिक विशेषज्ञों और पुलिस की अनुसंधान टीम के लिए भी जांच वैज्ञानिक, सटीक और पारदर्शी बनेगी। एम्स प्रबंधन की ओर से केंद्रीय स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी की बैठक में वर्चुअल ऑटोप्सी सेंटर का औपचारिक प्रस्ताव रखा गया था, जिसे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है और अब प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजा गया है। एम्स में जल्दी व्यवस्था होगी, जहां हर दिन 4 पोस्टमार्टम होते हैं।
-शव को विशेष फॉरेंसिक स्कैनिंग यूनिट में रखा जाएगा।
-एमआरआइ या सिटी स्कैन से पूरे शरीर की लेयर-बाय-लेयर इमेजिंग होगी।
- डिजिटल सॉफ्टवेयर से 3-डी मॉडल तैयार किया जाएगा।
- फॉरेंसिक डॉक्टर चोटों, अंगों की स्थिति और संभावित मृत्यु कारणों का विश्लेषण करेंगे।
- पूरी रिपोर्ट डिजिटल रूप में सुरक्षित की जाएगी।
- शव को काटने-फाड़ने की आवश्यकता नहीं।
- धार्मिक और सामाजिक भावनाओं का सम्मान।
- पोस्टमार्टम प्रक्रिया में समय की बचत।
- शव जल्दी परिजनों को सौंपा जा सकेगा।
- भोपाल एम्स के डॉक्टरों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों के लिए फायदे।
- चोटों और अंग क्षति का अत्यंत सटीक आकलन।
- 3-डी इमेज के माध्यम से जटिल मामलों में बेहतर समझ।
-हत्या, हादसा या आत्महत्या के मामलों में स्पष्ट और वैज्ञानिक सबूत।
- डिजिटल रिपोर्ट कोर्ट में मजबूत साक्ष्य के रूप में पेश की जा सकेगी।
- गोली लगने, धारदार हथियार से चोट, फ्रैक्चर, अंदरूनी रक्तस्राव की स्पष्ट पहचान।
- दुर्घटना में चोटों की दिशा और तीव्रता का विश्लेषण।
Published on:
07 Jan 2026 10:05 am
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