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शांति और सुकून देता है शिवपुरी

शिवपुरी मध्यप्रदेश का एक अत्यंत प्राचीन शहर है। शिवपुरी पर्यटकों के बीच में बेहद पवित्र और प्रसिद्ध शहर है।

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Juhi Mishra

Nov 01, 2015


भोपाल।
शिवपुरी मध्यप्रदेश का एक अत्यंत प्राचीन शहर है। शिवपुरी पर्यटकों के बीच में बेहद पवित्र और प्रसिद्ध शहर है। शिवपुरी को पूर्व में सीपरी के नाम से जाना जाता था। आजादी के बाद इस शहर को भगवान शिव के नाम पर शिवपुरी नाम प्राप्त हुआ। शिवपुरी को एक महान ऐतिहासिक स्थल के रूप में भी जाना जाता है जो अतीत की शाही विरासत का प्रतिनिधित्व करती है।





पवा जल प्रपात

पवा जल प्रपात शिवपुरी जिले की पोहरी तहसील में स्थित है। पवा जल प्रपात की दूरी शिवपुरी शहर से लगभग 40 किलोमीटर है। पवा जल प्रपात शिवपुरी श्योपुर हाईवे से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। शिवपुरी का नाम भगवान् शिव के नाम पर पड़ा है, जिसका कारण यह है कि शिवपुरी जिले में भगवान शिव के अनेकोनेक मंदिर दिखाई देते है जिनकी अपनी अपनी मान्यताएं भी है।


पवा झरना एक सुंदर झरना है। यहां भगवान शिव की भव्य मूर्ति है। पवा कुंड की गहराई लगभग 500 फीट है। कुंड के चारों ओर की पहाडिय़ों इस जगह को बेहद खूबसूरत एवं आकर्षक बनाती है। यह एक बहुत ही धार्मिक स्थल है। कहा जाता है कि इस पवित्र स्थान पर जो भी मन्नत मांगी जाए वह अवश्य पूर्ण होती है।





अक्टूबर माह से मार्च माह का समय पवा घूमने के लिए श्रेष्ठ है, परन्तु पवा जल प्रताप को निहारने और उसे कैमरे में कैद करने का सबसे सही समय बारिश का है। 500 फीट की ऊंचाई से जब पानी गिरता है, तब धुंआधार के समान चारों तरफ बस कोहरा ही कोहरा दिखाई देता है, जल प्रपात का यह अदभुद नजारा, पवा को शिवपुरी जिले के पर्यटक स्थलों में पहले स्थान पर रखता है। इस अनोखे स्थान के बारे में यह भी कहा जाता है कि यदि पवा के एक छोर से गोली दागी जाए तो वह दुसरे छोर पर नहीं पहुच पाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसका कारण इस स्थान पर गुरुत्वाकर्षण बल का अधिक होना है। बताया जाता है कि पुराने समय में डकैत इस जलप्रताप का सहारा पुलिस से बचने हेतु करते थे, डकैत इस जलप्रपात के दूसरी तरफ जाकर पुलिस की गोली से आसानी से बच निकलते थे।


पवा भगवान शिव में आस्था रखनेवाले भक्तों के लिए चमत्कारिक स्थल है। शिव भक्तों को यहाँ बेहद शांति का अनुभव होता है। झरने के आसपास घुमावदार पहाडिय़ां स्थित है, जहाँ काफी हरियाली है। यहाँ का दौरा पर्यटकों की यात्रा को ख़ास बना देता है। जल प्रपात के ऊपर मंदिर के बाहर एक कुंड भी है, जिसमें पर्याप्त मात्रा में पानी के सांप दिखाई देते है, लेकिन इन्होंने कभी किसी को कोई हानि नहीं पहुंचाई।




भूरा खो

शिवपुरी शहर से 10 किमी दूर स्थित प्राकृतिक झरना भूरा खो एक छोटा लेकिन सुंदर झरना है। भूरा खो में 25 फीट का आकर्षक झरना है जिसका पानी नीचे कुंड में गिरता है। यह माधव सागर झील के पास स्थित है। भूरा खो आगंतुकों के लिए एक मनोरंजन केंद्र है। भूरा खो पर भगवान शिव की प्राचीन प्रतिमा स्थापित है। यह झरना एक छोटी सी उचाई से गिरता है और पास ही नदी में विलीन हो जाता है। भूरा खो शिवपुरी के तीन प्रसिद्ध झरनों में से एक है। शिवपुरी में भूरा खो के अलावा सुल्तानगढ़ और पवा का झरना भी है।




सुल्तानगढ़ जलप्रपात

सुलतानगढ़ जलप्रपात शिवपुरी से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह एक प्रसिद्ध और मनमोहक पर्यटन स्थल है। सुल्तान गढ़ जलप्रपात चट्टानी इलाके के बीच में स्थित एक प्राकृतिक झरना हैं। पार्वती नदी इस झरने को खूबसूरती प्रदान करती है। हरे भरे जंगलों से घिरा हुआ यह क्षेत्र सुल्तान गढ़ जलप्रपात को भव्यता प्रदान करता है।


सुल्तान गढ़ जलप्रपात के आगंतुक पर्यटकों के अनुसार यह जलप्रपात बेहद ही खूबसूरत और सुखदायक है। सुल्तान गढ़ जलप्रपात और इसके आसपास का क्षेत्र एक प्रकृति प्रेमी की आँखों के लिए एक दावत स्वरुप है। यहाँ पर्यटकों को सूर्यउदय एवं सूर्यास्त के समय ज्वलंत रंगों के साथ क्षितिज में सूर्य को देखना बेहद खूबसूरत लगेगा।

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तात्या टोपे स्मारक

तात्या टोपे भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के एक प्रमुख सेनानायक थे। विद्रोह और अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध लडने के आरोप में 15 अप्रैल,1859 को शिवपुरी में तात्या का कोर्ट मार्शल किया गया। कोर्ट मार्शल के सब सदस्य अंग्रेज थे। परिणाम जाहिर था, उन्हें मौत की सजा दी गयी। शिवपुरी में उन्हें तीन दिन बंद रखा गया। 18 अप्रैल को शाम पाँच बजे तात्या को अंग्रेज कंपनी की सुरक्षा में बाहर लाया गया और हजारों लोगों की उपस्थिति में खुले मैदान में फाँसी पर लटका दिया गया। कहते हैं तात्या फाँसी के चबूतरे पर दृढ कदमों से ऊपर चढे और फाँसी के फंदे में स्वयं अपना गला डाल दिया। इस प्रकार तात्या मध्यप्रदेश की मिट्टी का अंग बन गये। नक्शे पर शिवपुरी जैसी छोटी जगह 1859 में अचानक चर्चित हो उठी थी। स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी, शौर्य और साहस के प्रतीक तात्याटोपे को मौत के सलीब पर लटका दिया गया।




सुरवाया की गढ़ी

सुरवाया की गढ़ी, भारत के इतिहास को कई मायनों में देदीप्यमान करती है। शिवपुरी से करीब 20 किमी. की दूरी पर झांसी रोड़ स्थित है जहां सुरवाया नमक एक छोटा सा कस्बा है, यहीं स्थित है सुरवाया की गढ़ी के। इस गढ़ी की ख़ास बात यह है कि यह विशालकाय प्रस्तर खण्डों से बनी है, जिन्हें केवल एक के ऊपर एक रखकर यह गढ़ी निर्मित की गई है 7 पत्थरों को जोडऩे के लिए कहीं भी चूने या अन्य किसी मसाले का उपयोग नहीं किया गया है 7 इस छोटे से शहर में एक शांत झील, दुनिया के पुराने आकर्षण की मानो आज भी साक्षी दे रही है। यहां एक प्रसिद्ध मंदिर स्थित है जो भगवान शिव को समर्पित है, यह मंदिर ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।


इस मंदिर की कला और स्थापत्य बेहद सुंदर है 7 मंदिर काफी प्राचीन है लेकिन आज भी इसकी सुन्दरता देखते ही बनती है। गढ़ी में एक सभागार है जो पूरी तरह से पत्थरों से ही निर्मित है। यह प्राचीन मठ है, इसे सरस्वती मंदिर माना जाता है तथा इसे एक बहुत बड़ा शिक्षा केंद्र माना जाता रहा है। किले की तरह विशाल प्राचीरों से घिरा प्रमुख मठ है, जिसमें रहने व अध्ययन के लिए बड़े-बड़े शिलाखंडों से निर्मित कक्ष हैं।




नरवर का किला

शिवपुरी जिले में नरवर का प्राचीन किला काली सिंध के पूर्व में है जो शिवपुरी से करीब 41 किमी की दूरी पर है। नरवर का किला मध्ययुगीन समय का है। महाभारत में वर्णित यह नगर राजा नल की राजधानी बताया गया है।12वीं शताब्दी तक इस नगर को नलपुरकहा जाता था। नरवर का किला बुंदेलखंड में पहले एवं मध्य भारत के ग्वालियर किले के बाद दूसरे नंबर का है। नरवर दुर्ग नाग राजाओं की राजधानी था। समुद्र गुप्त ने नाग राजाओं के वैभव को नष्ट करने हेतु उन पर आक्रमण किया था तथा उन्हें श्रीहीन कर यत्र तत्र विखंडित कर दिया था, जिसका उल्लेख इलाहाबाद स्तंभ में है।




छत्री

छतरी शिवपुरी में प्रसिद्ध स्मारकों में से एक है। माधवराव सिंधिया प्रथम ने अपनी स्वर्गवासी मां की स्मृति में यह छत्री शिवपुरी में बनवाई। संख्या राजे सिंधिया की स्मृति में समाधि स्थल के ठीक सामने तालाब और उसके बाद सामने ही माधव राव सिंधिया का समाधि स्थल बना है। इनके बुर्ज मुग़ल और राजपूत की मिश्रित शैली में निर्मित हैं।


भदैयाकुंड

शिवपुरी स्थित भदैया कुंड एक प्राकृतिक झरने के साथ एक सुंदर क्षेत्र है। पिकनिक क्षेत्र के रूप में भदैयाकुंड अलग है। भदैया कुंड का पानी चिकित्सकीय शक्तियों के लिए माना जाता है। भदैयाकुंड में वोट क्लब स्थित है। बरसात के मौसम के दौरान भदैयाकुंड का झरना पूर्ण प्रवाह में चलता है। इस झरने के नीचे और कुंड के पास एक गौ मुख है जहां से पानी निकलता है। शिवजी का मंदिर आस्था का केंद्र है, आसपास से काफी लोग यहां पहुंचते हैं।




माधव नेशनल पार्क

शिवपुरी में आगरा -बम्बई और झाँसी -शिवपुरी के मध्य माधव नेशनल पार्क स्थित है। इसका क्षेत्रफल 157.58 वर्ग किलोमीटर है। पार्क पूरे वर्ष सैलानियों के लिए खुला रहता है। चिंकारा, भारतीय चिकारे और चीतल की बड़ी संख्या में हैं। नील गाय, सांभर, चौसिंगा , कृष्णमृग, आलस भालू, तेंदुए और आम लंगूर विशाल पार्क के अन्य निवासी हैं।


सेसई स्थित 9-10वीं शताब्दी का सूर्य मंदिर

जिला मुख्यालय से 14 किलोमीटर दूर एबी रोड पर ग्राम सेसई में श्री शांतिनाथ नौगजा अतिशय क्षेत्र के पास स्थित 9-10वीं शताब्दी के मध्य प्रतिहार शैली में निर्मित हुआ वास्तुकला की अद्भुत नजीर सूर्यमंदिर। इस मंदिर के मुख्य द्वार के ललाट पर सूर्य की प्रतिमा अंकित है, जिसमें सूर्य सप्तअश्व की बाग पकड़े हुए दिखाए गए हैं। यही नहीं उनके पैरों में उपानह भी है और इसी आधार पर इसे सूर्य मंदिर माना गया है, जिसका उल्लेख यहां लगे बोर्ड पर भी अंकित किया गया है।


बाणगंगा

बाणगंगा, शिवपुरी में स्थित एक प्राचीन मंदिर है। बाणगंगा, हिन्दूओं के लिए एक धार्मिक और पवित्र भूमि है। बाणगंगा एक प्राचीन मंदिर है और माना जाता है कि पूर्वकाल में यहां 52 पवित्र कुंड बिद्यमान थे 7 माना जाता है कि शिवपुरी में जहां महाभारत काल में पांडवों ने अज्ञातवास के समय अजुज़्न ने अपने तीर से जल की धारा निकाली थी, आज वही स्थान बाणगंगा नाम से जाना जाता है यहां के पानी से नहाने से सारे चर्मरोग दूर होते हैं। मकर संक्रांति के दिन सुबह-सुबह नहाने का विशेष महत्व है इसी क्रम में बाणगंगा पर सभी श्रद्धालु नहाते है और वहां पर एक मेला भी लगता है जो कि सदियों से चला आ रहा है।

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