
ट्रैकिंग में मन मोह लेगी यहां की प्राकृतिक सुंदरता
अनूपपुर/भोपाल. पवित्र नगरी अमरकंटक में ट्रैकिंग पर्यटन को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों से लोग पहुंचते हैं। मैकल पर्वत श्रृंखला के बीच स्थित अमरकंटक में वन क्षेत्र से आच्छादित होने कारण ट्रैकिंग को लेकर बेहतर वातावरण है। यहां प्रतिवर्ष हजारों लोग ट्रैकिंग के लिए पहुंच रहे हैं। इसके लिए 15 किलोमीटर का ट्रैकिंग रूट विकसित किया गया है।
चारों तरफ घने जंगलों से भरे हुए ट्रैकिंग मार्ग पर सैलानियों को यहां प्राकृतिक सुंदरता को निहारने का मौका मिलता है। धार्मिक दृष्टि से भी अमरकंटक का महत्व होने से सालभर लोगों का आना-जाना लगा रहता है। हरी-भरी वादियों से घिरे होने तथा अन्य क्षेत्रों से यहां का तापमान कम होने की वजह से गर्मी में भी लोग पहुंचते हैं। बारिश के दिनों में घनी झाडिय़ां होने की वजह से ट्रैकिंग रूट बंद कर दिया जाता है।
दो जगह बने हैं रूट
अमरकंटक वन परिक्षेत्र में पहला ट्रैकिंग रूट शंभूधारा से कपिलधारा के बीच है। साढ़े सात किमी लंबा रूट हनुमान धारा, लक्ष्मण धारा, किहनी आमा, जामपानी, पंचधारा, दूधधारा, कपिलधारा मार्ग पर है। दूसरा रूट कबीर चबूतरा से सोनमुड़ा के बीच है, जो 8.3 किमी की दूरी का है। यह रुद्र गंगा, धोनीपानी, भृगु कमंडल, सोनमुड़ा मार्ग पर है।
प्रचार-प्रसार, सुविधाओं का अभाव
जानकारी के अनुसार ट्रैकिंग को लेकर स्थानीय स्तर पर ज्यादा तैयारियां नजर नहीं आतीं। इसके बावजूद प्राकृतिक सुंदरता, मैंकल पर्वत श्रृंखला की खूबसूरती को निहारने बीते वर्ष 6000 लोग ट्रैकिंग के लिए पहुंचे। वर्तमान में ट्रैकिंग के लिए स्थानीय स्तर पर ज्यादा प्रयास नहीं है। सिर्फ बंधा सोनमुड़ा बस स्टैंड तथा क्रीड़ा परिसर के समीप ट्रैकिंग संबंधी बोर्ड लगे हैं।
Published on:
23 Nov 2022 02:10 am
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